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बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्र में सफाई-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। बिहार लोकल बॉडीज इम्पलाइज फेडरेशन और राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के राज्यव्यापी आह्वान पर करीब 600 से 700 सफाईकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। अपनी लंबित तीन सूत्री मांगों को लेकर आक्रोशित इन कर्मचारियों ने नगर निगम के मेन गेट पर धरना देकर कामकाज पूरी तरह से ठप कर दिया है। मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। सफाई व्यवस्था पर असर इस हड़ताल का सबसे बड़ा और सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ने लगा है। नगर निगम क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 250 टन कचरे के उठाव पर अब गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बारिश का मौसम होने के कारण स्थिति और भी भयावह होने की आशंका है। अगर समय पर कचरा नहीं उठाया गया, तो शहर की सड़कों, नालियों और मोहल्लों में गंदगी का अंबार लग जाएगा। दुर्गंध और जलजमाव की समस्या से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा। महामारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाएगा। फिलहाल, निगम प्रशासन के पास कचरा उठाव की कोई वैकल्पिक व्यवस्था तैयार नहीं है, जिसके चलते घरों से निकलने वाला कचरा सड़कों और खाली जगहों पर फेंके जाने की प्रबल आशंका है। शहर के डंपिंग प्वाइंट पर जमा कचरे से उठने वाली बदबू पहले से ही लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है। तीन सूत्री मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें हैं, जिन्हें लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उनकी पहली मांग है कि बरसों से दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम कर रहे सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से स्थायी किया जाए। दूसरी प्रमुख मांग यह है कि नगर निगम में व्याप्त आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को पूरी तरह से समाप्त किया जाए। इसके स्थान पर, संविधान की मूल भावना के अनुरूप ‘समान काम का समान वेतन’ लागू किया जाए। सफाईकर्मियों का कहना है कि उन्हें भी सरकारी कर्मचारियों की तरह 50,000 से 55,000 रुपए का सम्मानजनक मासिक वेतन दिया जाना चाहिए। उनकी तीसरी मांग एसीपी और एमएसीपी योजनाओं के पूर्ण क्रियान्वयन तथा अब तक के सभी बकाया राशियों के अविलंब भुगतान से संबंधित है। झुकने को तैयार नहीं सफाईकर्मी नगर निगम गेट पर लाल झंडे और बैनर के साथ धरना दे रहे सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष विक्की कुमार ने प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से मजदूरों के हक की लड़ाई है। बरसों से पूरी लगन के साथ शहर को स्वच्छ रखने का काम करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी उपेक्षा कर रही है। अगर उनकी तीन सूत्री मांगें पूरी नहीं होती है, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानती है, तो पूरे शहर में सफाईकर्मी जुलूस निकालेंगे। हम जगह-जगह मोड़ पर कचरा उछालने का काम करेंगे और नगर निगम के गेट पर कुत्ता, बिल्ली, गाय और अन्य जानवर बांधने का काम करेंगे। अपने हक के लिए हमें चाहे जेल जाना पड़े, लाठियां खानी पड़ें या गोलियां खानी पड़ें, हम तैयार हैं। इस बार हम बिल्कुल झुकने वाले नहीं हैं। महिला कर्मियों में भी भारी आक्रोश हड़ताल में महिला सफाईकर्मियों की भी बड़ी भागीदारी है। धरनास्थल पर मौजूद महिला सफाईकर्मी जूली खातून ने भी अपनी पीड़ा और मांगें मुखरता से रखी। उन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई में वर्तमान वेतन से परिवार का भरण-पोषण असंभव हो गया है। नगर निगम को उनकी सभी मांगें पूरी करनी चाहिए। उनका वेतन बढ़ाकर 40,000 से 50,000 रुपए किया जाना चाहिए और जो लोग ठेके या आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे हैं, उन्हें नियमित किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी कर्मचारी को काम से निकाला नहीं जाना चाहिए। फेडरेशन और मोर्चा का कड़ा रुख बिहार लोकल बॉडीज इम्पलाइज फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार सिंह ने बयान जारी कर कहा है कि सरकार की ओर से लगातार स्थानीय निकाय कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की जा रही है। अगर सरकार का यही रवैया रहा तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सिंह ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि बरसों से कार्यरत दैनिक कर्मियों को स्थायी करने के बजाय सरकार जानबूझकर ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है, जो सीधे तौर पर मजदूरों का शोषण है। बहरहाल, बिहारशरीफ नगर निगम के मुख्य द्वार पर तालाबंदी और धरने के कारण प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित हुआ है। शहरवासियों की नजरें अब जिला प्रशासन और नगर विकास विभाग पर टिकी हैं कि वे कैसे इस संकट का समाधान निकालते हैं।
