बेगूसराय सदर प्रखंड में भीषण गर्मी के कारण मछली पालन व्यवसाय पर संकट गहरा गया है। पिछले छह दिनों से जारी अत्यधिक तापमान और गिरते जलस्तर के कारण दर्जनों तालाब सूखने की कगार पर हैं। इससे मछलियों के मरने और हजारों रुपये के नुकसान को लेकर मछली पालक चिंतित हैं। चांदपूरा, सुजा और नीमा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बीते एक सप्ताह से 41 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। इस कारण क्षेत्र के दर्जनों तालाब पूरी तरह सूख गए हैं, जबकि कई अन्य तालाबों में 50 से 80 प्रतिशत तक पानी कम हो गया है। इसका सीधा असर मछली पालन पर पड़ रहा है। मछली पालकों के अनुसार, तालाबों का जलस्तर तेजी से घटने से मछलियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। इसके चलते मछलियां बार-बार पानी की सतह पर आकर सांस ले रही हैं और कई स्थानों पर उनकी मौत भी हो रही है। मछलियों को बचाने के लिए मोटर से पानी डालना पड़ रहा है, जिससे बिजली का खर्च काफी बढ़ गया है। इस स्थिति से मछली पालकों को हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। स्थानीय मछली पालक रविन्द्र सहनी, हिमांशु सहनी और पंकज सहनी ने बताया कि तालाबों का पानी आधा रह गया है। गर्मी के कारण मछलियां ऊपर आकर सांस ले रही हैं, जिससे उनका नुकसान लगातार बढ़ रहा है। इस बीच, स्थानीय बाजारों में रोहू, कतला और गोल्डफिश सहित अन्य प्रकार की मछलियों की आवक में कमी देखी जा रही है। कारोबारियों के मुताबिक, मछलियों की कमी के कारण कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां मछली 300 से 400 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब इसकी कीमत 20 से 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई है। गर्मी और जलसंकट का असर केवल मछली पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पशु-पक्षी भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं। कई छोटे जलस्रोत और तालाब सूखने लगे हैं, जिससे जानवरों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। मछली पालकों ने प्रशासन और मत्स्य विभाग से राहत तथा आवश्यक सहायता की मांग की है।
बेगूसराय में तालाब सूखने से मछली पालन पर संकट:तालाबों में पानी की कमी से मछलियां मर रहीं, पालकों को हजारों का नुकसान
बेगूसराय सदर प्रखंड में भीषण गर्मी के कारण मछली पालन व्यवसाय पर संकट गहरा गया है। पिछले छह दिनों से जारी अत्यधिक तापमान और गिरते जलस्तर के कारण दर्जनों तालाब सूखने की कगार पर हैं। इससे मछलियों के मरने और हजारों रुपये के नुकसान को लेकर मछली पालक चिंतित हैं। चांदपूरा, सुजा और नीमा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बीते एक सप्ताह से 41 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। इस कारण क्षेत्र के दर्जनों तालाब पूरी तरह सूख गए हैं, जबकि कई अन्य तालाबों में 50 से 80 प्रतिशत तक पानी कम हो गया है। इसका सीधा असर मछली पालन पर पड़ रहा है। मछली पालकों के अनुसार, तालाबों का जलस्तर तेजी से घटने से मछलियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। इसके चलते मछलियां बार-बार पानी की सतह पर आकर सांस ले रही हैं और कई स्थानों पर उनकी मौत भी हो रही है। मछलियों को बचाने के लिए मोटर से पानी डालना पड़ रहा है, जिससे बिजली का खर्च काफी बढ़ गया है। इस स्थिति से मछली पालकों को हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। स्थानीय मछली पालक रविन्द्र सहनी, हिमांशु सहनी और पंकज सहनी ने बताया कि तालाबों का पानी आधा रह गया है। गर्मी के कारण मछलियां ऊपर आकर सांस ले रही हैं, जिससे उनका नुकसान लगातार बढ़ रहा है। इस बीच, स्थानीय बाजारों में रोहू, कतला और गोल्डफिश सहित अन्य प्रकार की मछलियों की आवक में कमी देखी जा रही है। कारोबारियों के मुताबिक, मछलियों की कमी के कारण कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां मछली 300 से 400 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब इसकी कीमत 20 से 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई है। गर्मी और जलसंकट का असर केवल मछली पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पशु-पक्षी भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं। कई छोटे जलस्रोत और तालाब सूखने लगे हैं, जिससे जानवरों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। मछली पालकों ने प्रशासन और मत्स्य विभाग से राहत तथा आवश्यक सहायता की मांग की है।


