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शहरी क्षेत्र के पावरगंज स्थित बॉक्साइट डंपिंग यार्ड के विस्थापित मजदूरों ने शुक्रवार को नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव के नेतृत्व में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। मजदूरों ने रोजगार बहाल कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि डंपिंग यार्ड पिछले 17 वर्षों से संचालित था। इसे अचानक, बिना किसी पूर्व सूचना के बंद कर दिया गया। मजदूरों के अनुसार, डंपिंग यार्ड बंद होने के बावजूद हिंडाल्को कंपनी द्वारा संचालित रोपवे अब भी चालू है।मजदूरों का आरोप है कि हिंडाल्को कंपनी ने पर्यावरण प्रदूषण का हवाला देकर स्थानीय मजदूरों को काम से रोक दिया है। इसी जिले के हेसल स्थित बॉक्साइट डंपिंग यार्ड में मजदूरों को काम करने की अनुमति दी जा रही है। मजदूरों ने इसे स्थानीय श्रमिकों के साथ भेदभाव बताया। इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।मजदूरों ने बताया कि रोजगार बंद होने से उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। बच्चों की स्कूल फीस नहीं भर पाने के कारण स्कूलों से नाम काट दिए गए हैं। परिवार में किसी के बीमार होने पर इलाज कराना भी मुश्किल हो गया है।नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव ने उपायुक्त को बताया कि हिंडाल्को कंपनी की ओर से जनहित में कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं किया जा रहा है। न तो क्षेत्र में कोई अच्छा विद्यालय या अस्पताल खोला गया है। न ही सीएसआर के तहत जनहित के कार्य सुचारू रूप से किए जा रहे हैं।
बॉक्साइट डंपिंग यार्ड बंद होने से मजदूरों के रोजगार पर संकट
