भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से 4 सप्ताह के अंदर रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई और समीक्षा 13 जुलाई को की जाएगी। यह कार्रवाई मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एसके झा की ओर से दायर याचिका पर की गई है। अधिवक्ता ने भोजपुर एनकाउंटर को लेकर बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। एनकाउंटर की तस्वीरें… एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाए मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत से जुड़ा है। परिजनों और याचिकाकर्ता की ओर से एनकाउंटर की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए हैं। इसी को लेकर आयोग ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनंत मनोहर बदर की पीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर 13 जुलाई को पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच हो अधिवक्ता एस.के. झा ने अपनी याचिका में मांग की है कि एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। पूरे मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है। अधिवक्ता झा ने आयोग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के संरक्षण को लेकर गंभीर और सजग है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग की निगरानी में मामले की निष्पक्ष जांच होगी और सच्चाई सामने आएगी।


