Sunday, May 10, 2026

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भागते रहो या पेश हो जाओ, एनआईए कोर्ट ने नक्सली रवींद्र गंझू को दिया अल्टीमेटम


झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के संकेत देते हुए रांची की एनआईए (NIA) विशेष अदालत ने कुख्यात नक्सली रवींद्र गंझू को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर हाजिर हो, नहीं तो उसकी गैर-मौजूदगी में ही सजा की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। लंबे समय से फरार चल रहे गंझू को अदालत ने भगोड़ा घोषित करते हुए यह सख्त आदेश जारी किया है। इसके बाद जांच एजेंसियों ने लातेहार जिले के हेसला, बॉझीटोला स्थित उसके घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी नोटिस चस्पा कर दिया है। 20 लाख का इनामी है रवींद्र गंझू रविन्द्र गंझू सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। वह लगातार ठिकाना बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा है। संगठन में कद: वह प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) का रीजनल कमेटी मेंबर है। इनाम की राशि: उस पर झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपए और एनआईए ने 5 लाख रुपए (कुल 20 लाख रुपए) का इनाम घोषित कर रखा है। मुख्य मामला: उस पर एनआईए केस आरसी-38/2020/एनआईए के तहत कई बड़े नक्सली हमलों और लेवी वसूली के गंभीर आरोप हैं। पहली बार ऐसी कार्रवाई: झारखंड में यह संभवतः पहला मामला है, जब किसी शीर्ष नक्सली के खिलाफ उसकी गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू करने की तैयारी हो रही है। यह फरार नक्सलियों के लिए एक सख्त संदेश है। आर्थिक ढांचा तबाह करने की तैयारी में पुलिस प्रतिबंधित नक्सली संगठनों के खिलाफ पुलिस ने न केवल ऑपरेशन तेज कर दिया है, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की रणनीति भी बनाई है। लेवी पर प्रहार: पुलिस बचे हुए नक्सल कमांडरों को मिलने वाली लेवी (अवैध वसूली) की रकम को रोकना चाहती है। पुलिस को इनपुट मिले हैं कि बेहद कमजोर होने के बावजूद कुछ लोग नक्सलियों को अब भी लेवी दे रहे हैं, जिससे वे हथियार और गोलियां खरीद रहे हैं। अधिकारियों की तय हुई जिम्मेदारी: सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नक्सलियों के खिलाफ सटीक सूचनाएं जुटाएं और उनके आर्थिक ढांचे को तबाह करने के लिए विशेष कार्रवाई करें। 70 करोड़ का था साम्राज्य: बता दें कि झारखंड-बिहार का इलाका माओवादियों के मध्य जोन में आता है। जब माओवादी बेहद मजबूत स्थिति में थे, तब इस जोन से सालाना करीब 70 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लेवी वसूली जाती थी।

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