![]()
नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी के आरोपी मनोज कुमार वर्मा के घर पुलिस ने ढोल बजाया। उस पर कैंसर पीड़ित महिला से 5.60 लाख रुपए लेने का आरोप है। बांका कोर्ट से उसकी अग्रिम जमानत भी रद्द हो चुकी है। मनोज खुद को सीआईडी का डीएसपी बताता था और सरकारी विभागों में पहुंच का दावा करता था। वह लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ठग चुका है। इस मामले में बांका और भागलपुर में अलग-अलग केस दर्ज हुए हैं। इसाकचक थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर उसके भीखनपुर स्थित घर पर इश्तेहार चिपकाया। पुलिस ने ढोल बजाकर यह संदेश दिया कि अगर वह अब भी कोर्ट में पेश नहीं हुआ, तो उसकी संपत्ति जब्त की जाएगी। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत उद्घोषणा की कार्रवाई कानूनी भाषा में इस कार्रवाई को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत उद्घोषणा की कार्रवाई कहा जाता था। हालांकि, एक महत्वपूर्ण कानूनी बात यह है कि एक जुलाई 2024 से लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में फरार व्यक्ति की उद्घोषणा से संबंधित प्रावधान धारा 84 में है। इसलिए इस मामले में आदेश किस धारा के तहत जारी हुआ है, इसकी पुष्टि न्यायालय के मूल आदेश से ही की जा सकती है। पुलिस की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि मामला अब केवल शिकायत और प्राथमिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि आरोपित की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, इश्तेहार चस्पा होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपित दोषी साबित हो गया है। कैंसर पीड़ित सोनम भारती से 5.60 लाख रुपये लेने का आरोप इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बांका की रहने वाली सोनम भारती से जुड़ा है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वह चौथे चरण के कैंसर से पीड़ित है और उसे सबौर स्थित कृषि महाविद्यालय में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर मनोज वर्मा ने अलग-अलग माध्यमों से कुल 5 लाख 60 हजार रुपये लिए। पीड़िता के अनुसार, रुपये नकद, बैंक हस्तांतरण और फोन-पे के माध्यम से दिए गए। आरोप है कि नौकरी दिलाने के लिए तय समय बीत जाने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही पूरी रकम वापस की गई। जब उसने अपने पैसे मांगे तो कथित तौर पर उसे टालमटोल का सामना करना पड़ा और बाद में संपर्क भी बंद कर दिया गया। मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर फरार आरोपित के घर इश्तेहार चस्पा करने की कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, कैंसर पीड़ित महिला से नौकरी दिलाने के नाम पर 5.60 लाख रुपये की ठगी का आरोप है। उन्होंने बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी अभी नहीं हो सकी है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुसार होगी। कभी सीआईडी का डीएसपी, कभी बड़े अधिकारियों तक पहुंच का दावा मनोज वर्मा पर आरोप है कि वह खुद को सीआईडी का डीएसपी बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था और सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में नौकरी दिलाने के नाम पर भी लोगों से रुपये लेने की शिकायतें सामने आई हैं। भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने अगस्त 2026 में मीडिया को बताया था कि मनोज वर्मा डीएसपी नहीं है। उसके पुलिस विभाग में अलग पद पर कार्य करने और स्पेशल ब्रांच से जुड़े होने के बारे में बताते थे। उसके वास्तविक पद और सेवा की वर्तमान स्थिति के संबंध में अब तक कुछ स्पष्ट नहीं है। एक नहीं, कई शिकायतों की चर्चा मनोज वर्मा के खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी की अन्य शिकायतें भी सामने आई हैं। भागलपुर की महिला से उसके बेटे को सबौर कृषि महाविद्यालय में नौकरी दिलाने के नाम पर तीन लाख रुपये लेने का आरोप है। एक अन्य मामले में पटना की महिला से 90 हजार रुपये लेने की शिकायत की थी, जिसमें 52 हजार रुपये वापस किए जाने की जानकारी दी गई थी।इसके अतिरिक्त, एनटीपीसी में नौकरी दिलाने के नाम पर 2.11 लाख रुपये लेने का आरोप भी सामने आया था। बांका कोर्ट से भी नहीं मिली राहत इस मामले में बांका जिला एवं सत्र न्यायालय ने मनोज कुमार वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बांका थाना कांड संख्या 367/26 और अग्रिम जमानत आवेदन संख्या 992/2026 का उल्लेख किया गया है। अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत का विरोध करते हुए अन्य शिकायतों और दस्तावेजों का हवाला दिया और जमानत खारिश करने का अनुरोध किया था। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने और अब घर पर इश्तेहार चस्पा किए जाने की कार्रवाई से आरोपित के लिए कानूनी स्थिति और चुनौतीपूर्ण होती दिखाई दे रही है।
भागलपुर- फर्जी डीएसपी के घर पुलिस ने बजाया ढोल:नौकरी का झांसा देकर कैंसर पीड़ित से 5.60 लाख ठगे; घर पर इश्तेहार चस्पा, अब कुर्की-जब्ती की तैयारी
