भागलपुर में मुहर्रम के अवसर पर शिया समुदाय की ओर से पारंपरिक अलम जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए और इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। जुलूस के दौरान मातम, नौहाखानी और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। अलम जुलूस शहर के अलग-अलग मार्गों से होकर गुजरा। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के बीच अनुशासन और श्रद्धा का विशेष भाव देखने को मिला। ‘या हुसैन’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। लोगों ने हाथों में अलम लेकर कर्बला की घटना को याद किया। इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की कुर्बानी को सलाम किया। अमन-चैन, भाईचारे और मानवता की रक्षा के लिए विशेष दुआएं मौलाना सैयद मोहम्मद अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी इंसानियत के लिए एक महान मिसाल है। उनका संदेश हमें सच्चाई, इंसाफ और मानवता के रास्ते पर चलने की सीख देता है। उन्होंने सभी लोगों से आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। मो. जाकिर ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं है, बल्कि यह अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक भी है। इमाम हुसैन ने इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपनी और अपने परिवार की कुर्बानी दी थी। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को सत्य के मार्ग पर चलने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इस मौके पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। शहर के अलग-अलग इलाकों में करीब 2000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। पुलिस बल के जवान और अधिकारी पूरे मार्ग पर तैनात रहे, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा लिया।
भागलपुर में मुहर्रम पर अलम जुलूस निकाला गया:इमाम हुसैन की शहादत को किया याद; सुरक्षा के लिए 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती
भागलपुर में मुहर्रम के अवसर पर शिया समुदाय की ओर से पारंपरिक अलम जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए और इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। जुलूस के दौरान मातम, नौहाखानी और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। अलम जुलूस शहर के अलग-अलग मार्गों से होकर गुजरा। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के बीच अनुशासन और श्रद्धा का विशेष भाव देखने को मिला। ‘या हुसैन’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। लोगों ने हाथों में अलम लेकर कर्बला की घटना को याद किया। इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की कुर्बानी को सलाम किया। अमन-चैन, भाईचारे और मानवता की रक्षा के लिए विशेष दुआएं मौलाना सैयद मोहम्मद अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी इंसानियत के लिए एक महान मिसाल है। उनका संदेश हमें सच्चाई, इंसाफ और मानवता के रास्ते पर चलने की सीख देता है। उन्होंने सभी लोगों से आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। मो. जाकिर ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं है, बल्कि यह अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक भी है। इमाम हुसैन ने इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपनी और अपने परिवार की कुर्बानी दी थी। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को सत्य के मार्ग पर चलने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इस मौके पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। शहर के अलग-अलग इलाकों में करीब 2000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। पुलिस बल के जवान और अधिकारी पूरे मार्ग पर तैनात रहे, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा लिया।

