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Bhadrapad Masik Shivratri 2026: भगवान शिव को समर्पित मासिक शिवरात्रि हर चंद्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है. मासिक शिवरात्रि वो व्रत है जो शिव और शक्ति साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. सुहागिनों, अविवाहितों, करियर में सुख, समृद्धि पाने वालों के लिए ये दिन ये दिन खास है. इस बार भाद्रपद माह की मासिक शिवरात्रि 9 सितंबर 2026 को है.
मासिक शिवरात्रि असंभव को संभव करने वाला व्रत
शिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना और आत्मसंयम का अवसर माना जाता है. धार्मिक मान्यता में इस व्रत को मन की शांति, शिव भक्ति और इच्छापूर्ति से जोड़ा गया है. मनचाहे जीवनसाथी और जीवन में स्थिरता की कामना, दांपत्य जीवन में प्रेम, सामंजस्य, सुख-शांति, पति की दीर्घायु और परिवार के मंगल कामना के लिए ये व्रत अचूक माना जात है. मान्यता है जो पूरे विधि विधान से सालभर की सभी मासिक शिवरात्रि व्रत करता है उसके असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं.
कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
- सुबह स्नान करके भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें.
- दिनभर सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रखें.
- शाम को शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं. निशीथ काल में महादेव का अभिषेक करें.
- जल, दूध, दही, घी, शहद आदि से अभिषेक करें.
- शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरा अर्पित करें.
- ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
- रात में संभव हो तो चार प्रहर पूजा और जागरण करें.
- अगले दिन पूजा के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें.
क्या हैं व्रत के नियम?
मासिक शिवरात्रि में केवल भोजन छोड़ना ही व्रत का उद्देश्य नहीं माना जाता. मन, वाणी और कर्म में संयम रखना भी साधना का हिस्सा है. व्रत रखने वाले को क्रोध, विवाद, निंदा और असत्य से बचना चाहिए. स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का स्वरूप चुनना उचित है; निर्जल व्रत सभी के लिए आवश्यक नहीं है.
किसने किया था शिवरात्रि का व्रत?
शिवरात्रि व्रत से जुड़ी परंपराओं में देवी पार्वती का विशेष उल्लेख मिलता है. धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में पार्वती द्वारा भगवान शिव की प्राप्ति के लिए तपस्या और शिव आराधना का वर्णन मिलता है. इसी कारण अविवाहित महिलाएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं. शिव पुराण के अनुसार लक्ष्मी, सरस्वती, सावित्री, सीता और रति देवियों ने भी शिवरात्रि व्रत किया था.
इस तरह मासिक शिवरात्रि केवल हर महीने आने वाला व्रत नहीं, बल्कि नियमित रूप से शिव साधना करने का अवसर है. इसमें उपवास के साथ शिवलिंग अभिषेक, मंत्र-जप, रात्रि जागरण और संयम को विशेष महत्व दिया जाता है.
FAQ
1. क्या मासिक शिवरात्रि का व्रत मनचाही इच्छा पूरी करता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से मासिक शिवरात्रि व्रत करने से मनोकामना पूर्ति, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है.
2. मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव को क्या चढ़ाएं?
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरा अर्पित किया जाता है. साथ ही ॐ नमः शिवाय का जाप करना शुभ माना जाता है.
3. क्या मासिक शिवरात्रि पर रातभर जागना जरूरी है?
रात्रि जागरण और चार प्रहर शिव पूजा की परंपरा है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता. अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार पूजा-व्रत करना उचित है.
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