Sunday, October 18, 2026
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महाअष्टमी पर सिद्धिदात्री मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़:झारखंड से भी पहुंचे श्रद्धालु, डलिया चढ़ाकर महिलाओं ने लिया आशीर्वाद


भागलपुर जिले के सनहौला प्रखंड में महाअष्टमी पर चारों ओर भक्ति का माहौल है। महादेव स्थान के प्रसिद्ध सिद्धिदात्री मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित इस मंदिर में दोनों राज्यों से हजारों भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह से ही मंदिर में भक्तों का आना जारी है। ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज रहा है। श्रद्धालु मां के चरणों में माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि मांग रहे हैं। श्री श्री 108 सिद्धिदात्री पूजा समिति के अध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह ने बताया कि महाअष्टमी पर चार पंचायतों की महिलाएं मंदिर पहुंचकर मां को डलिया अर्पित करती हैं। इस खास परंपरा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं आ रही हैं। वे पूरी श्रद्धा से पूजा कर सुख-शांति की कामना करती हैं। डलिया अर्पित करने की इस परंपरा को लेकर मंदिर में विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दलिया से संबंधित प्रसाद लेने के लिए कतारबद्ध व्यवस्था बनाई गई है। समिति की ओर से रसीद काटी जाती है और रसीद के अनुसार ही संबंधित श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाता है। इससे भीड़ को व्यवस्थित रखने और अनावश्यक अफरातफरी रोकने में मदद मिल रही है। 19 से 21 अक्टूबर तक धार्मिक आयोजनों की धूम सिद्धिदात्री मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ मेले का उत्साह भी चरम पर है। पूजा समिति के अध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह के अनुसार, 19 अक्टूबर को बलि का आयोजन होगा। 20 अक्टूबर को ढोडिया कसौली और 21 अक्टूबर को रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इन आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। खासकर मेले के अंतिम दिन रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। समिति अध्यक्ष के मुताबिक, अंतिम दिन मेले में ढाई से तीन लाख तक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए समिति की ओर से व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिला दल से लेकर स्कॉउट-गाइड तक तैनात आस्था के इस विशाल मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण समिति के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। इसे ध्यान में रखते हुए मेला समिति ने अपने स्तर पर अलग-अलग समूह बनाए हैं। इनमें महिला प्रभारी की अलग व्यवस्था की गई है, ताकि महिला श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर सहायता मिल सके। इसके साथ ही स्काउट-गाइड की भी मदद ली जा रही है। मेला समिति के स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने, श्रद्धालुओं को कतार में रखने और व्यवस्था बनाए रखने में जुटे हैं। समिति अध्यक्ष ने बताया कि भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए स्वयंसेवकों को लगाया गया है। इसके अलावा स्थानीय पुलिस बल का भी सहयोग मिल रहा है। आस्था के साथ अनुशासन का संदेश, मां के दरबार में व्यवस्थित दर्शन पर जोर मंदिर में उमड़ रही भीड़ के बीच समिति की प्राथमिकता है कि हर श्रद्धालु को सुविधाजनक तरीके से मां के दर्शन का अवसर मिले। दलिया अर्पित करने की व्यवस्था से लेकर प्रवेश तक रसीद के आधार पर निगरानी रखी जा रही है। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को कतार में रहने और निर्धारित व्यवस्था का पालन करने में सहयोग कर रहे हैं। बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और मनोकामनाओं का पवित्र केंद्र भी है।

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