राज्य के जलाशयों में महाझींगा पालन से आदिवासी समुदाय, खासकर आदिम जनजातियों की आय में सुधार और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। मत्स्य निदेशालय के निदेशक अमरेन्द्र कुमार ने कहा कि वर्तमान में झारखंड के तीन जलाशयों में महाझींगा का पालन किया जा रहा है। जिसमें हजारीबाग के घाघरा, सिमडेगा के केलाघाघ और गुमला के मसरिया जलाशय में बेहतर परिणाम मिले हैं। जिससे आदिम जनजातियों की आजीविका और जीवनशैली में अपेक्षाकृत सुधार हो रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग के प्रयासों से यह योजना आईसीएआर-सीआईएफआरआई, बैरकपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके दास की देखरेख में संचालित हो रही है।अन्य जिलों के जिला मत्स्य पदाधिकारी ने भी नए जलाशयों में महाझींगा के पालन में अभिरुचि दिखा रहे हैं। कार्यक्रम के तहत 22 से 28 मार्च तक राज्य के कई जिलों के विभिन्न जलाशयों में महाझींगा बीज का संचयन किया गया, जबकि दुमका के बांकीबेरा जलाशय में 30 मार्च को दो लाख महाझींगा बीज का संचयन होना है। विभाग द्वारा जलाशयों के किसानों को महाझींगा पालन के लिए आहार, मिनरल और जियोलाइट भी उपलब्ध कराया जा रहा है।