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गयाजी शहर के सर्किट हाउस में अलीनगर विधानसभा क्षेत्र की विधायक मैथिली ठाकुर ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। विधायक ठाकुर ने कहा कि यह अधिनियम देश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता था। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि विपक्ष के विरोध के कारण इसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका, जिसे उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अधिकारों के लिए मील का पत्थर बन सकता था उन्होंने बताया कि पूरे देश में इस अधिनियम को लेकर सकारात्मक माहौल था और 17 अप्रैल को एक ऐतिहासिक दिन के रूप में देखा जा रहा था। प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय नेतृत्व और गृह मंत्री के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह दिन महिलाओं के अधिकारों के लिए मील का पत्थर बन सकता था, लेकिन विपक्ष ने विभिन्न तर्क-वितर्क के माध्यम से इस पहल को बाधित किया। मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाया, “क्या संविधान की जीत, नारी शक्ति की हार के रूप में हो सकती है?” उनके अनुसार, यह स्थिति न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि देश की महिलाओं की उम्मीदों के साथ भी अन्याय है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन की ओर से इस घटनाक्रम पर गहरा खेद व्यक्त किया। विधायक ने आगे कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो जनगणना और परिसीमन के आधार पर संसद में सीटों की संख्या बढ़ती और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता। इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती और वे अपने मुद्दों को अधिक मजबूती से रख पातीं। इसके अलावा, उन्होंने सांसद पप्पू यादव की ओर से महिला नेता पर दिए गए कथित अभद्र बयान की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान न केवल अपमानजनक हैं बल्कि राजनीति के स्तर को भी गिराते हैं। उन्होंने कहा, “एक महिला होने के नाते यह बेहद पीड़ादायक है। ऐसे व्यक्ति को माफी मांगनी चाहिए, हालांकि ऐसे बयान माफ करने योग्य नहीं हैं।” उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उनके परिवार ने उन पर भरोसा जताकर उन्हें राजनीति में आने का अवसर दिया है और उनका उद्देश्य समाज के लिए सकारात्मक काम करना है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने वाले हर व्यक्ति को कुछ बड़ा और सार्थक करने की मंशा रखनी चाहिए। विधायक ठाकुर ने दोहराया कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना जानती हैं।

