
खास बातें
Egg Politics in Bengal: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक अखाड़े में इन दिनों एक बेहद अजीब और अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिल रहा है. बंगाली परिवारों की थाली का साधारण और किफायती हिस्सा अंडा (Egg) अब राज्य का सबसे बड़ा सियासी हथियार बन गया है. बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से पोल्ट्री उत्पाद सड़कों पर नेताओं को अपमानित करने का हिंसक माध्यम बन गया है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक नीतियों को लेकर गहरे ध्रुवीकरण का कारण भी बन चुका है.
महुआ से अभिषेक बनर्जी तक सब बने अंडे का शिकार
बंगाल में जारी इस ‘एग थेरेपी’ या ‘एग वॉरफेयर’ (Egg Warfare) का सबसे ताजा और हिंसक रूप नदिया जिले के कृष्णनगर में देखने को मिला. ममता बनर्जी गुट की फायरब्रांड तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोईत्रा (Mahua Moitra) पर बुधवार को उग्र भीड़ ने काले झंडे दिखाये. अंडे और सड़े बैंगन से उन पर हमला किया. महिला सांसद ने भीड़ को ‘भाजपा के गुंडे’ करार दिया. हालात इतने हो गये खराब थे कि सांसद ने एक घंटे तक खुद को कमरे में कैद कर लिया.
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बंगाल की राजनीति का नया ट्रेंड
बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर अंडे फेंके जाने का यह चलन राज्य का नया ट्रेंड बन गया है.
- 30 मई 2026 को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में अंडा फेंका गया. उन पर ईंट-पत्थरों से भी हमले किये गये. इसके बाद सुरक्षा के लिए उन्हें क्रिकेट हेलमेट पहनना पड़ा था.
- पूर्व मेयर सब्यसाची दत्ता और कुणाल घोष जैसे एक दर्जन से अधिक टीएमसी नेता पुलिस सुरक्षा या कोर्ट में पेशी के दौरान ‘अंडा थेरेपी’ का शिकार हो चुके हैं. सौगत रॉय और मदन मित्र जैसे नेताओं पर भी अंडे बरसाये जा चुके हैं.
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कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त रुख
अंडा से हो रहे हमले पर कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने राजनीतिक विरोधियों पर अंडे फेंकने की इस प्रवृत्ति को एक सामाजिक बुराई (Social Evil) करार दिया है. कोर्ट ने प्रशासन को कड़ी पुलिसिंग गाइडलाइंस बनाने और अब तक हुई गिरफ्तारियों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
मिड-डे मील विवाद: प्लेट से अंडा हटाने पर बवाल
सड़कों पर हथियार बनने के साथ ही अंडा इस समय राज्य सचिवालय के गलियारों में भी विवाद की वजह बना हुआ है. कोलकाता नगर निगम (KMC) के एक नये पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों के मिड-डे मील (Mid-day Meal) की जिम्मेदारी ‘अन्नमित्रा फाउंडेशन’ को सौंपने की तैयारी चल रही है, जो इस्कॉन (ISKCON) से जुड़ी संस्था है.
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Egg Politics in Bengal: प्रोजेक्ट की विवादित शर्त
इस प्रोजेक्ट की सबसे विवादित शर्त यह है कि स्कूलों के मेन्यू से अंडे को हटा दिया जायेगा. उसकी जगह शाकाहारी प्रोटीन विकल्प जैसे पनीर और सोया चंक्स दिये जायेंगे. इस फैसले से राज्य में धर्मनिरपेक्ष (Secular) और पोषण संबंधी विरोध शुरू हो गया. महुआ मोईत्रा, डेरेक ओब्रायन और रीतब्रत बनर्जी जैसे नेताओं ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया. कहा कि यह ‘खान-पान की जबरन थोपी गयी नीति’ है. इनका कहना है कि बंगाल में अंडा बच्चों के लिए पूर्ण प्रोटीन का सबसे सस्ता और सुलभ स्रोत है. धार्मिक प्राथमिकताओं के कारण बच्चों के पोषण से समझौता नहीं किया जा सकता.
ओडिशा मॉडल पर विचार कर रही बंगाल सरकार
भारी राजनीतिक दबाव के बाद राज्य प्रशासन पड़ोसी राज्य ओडिशा के मॉडल का अध्ययन कर रहा है, ताकि स्कूलों को सीधे अलग से फंड दिया जा सके. इस फंड से स्कूल केंद्रीय शाकाहारी रसोई से इतर स्वतंत्र रूप से बच्चों के लिए अंडे खरीद सकेंगे.
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