मांडर अंचल में 14.34 एकड़ सरकारी जमीन घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करेगा। जमीन घोटाले से जुड़े पहले से दर्ज ईसीआईआर में इस मामले को भी शामिल किया जाएगा। इधर, अंचल अधिकारी चंचला कुमारी ने राजस्व कर्मचारी पुना उरांव के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीसी मंजूनाथ भजंत्री को पत्र भेजा है। आरोप है कि मौजा हेसमी के खाता संख्या 152, प्लॉट संख्या 1163 की गैरमजरुआ सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से पंजी-2 में नारायण मिस्त्री के नाम दर्ज कर दिया गया। स्पष्टीकरण मांगे जाने पर कर्मचारी ने आरोपों से इनकार किया है।जमीन की दावेदार महिला आई सामने: रांची-लोहरदगा हाईवे स्थित इस बेशकीमती 14.34 एकड़ जमीन को मांडर की रहने वाली सरोज लकड़ा ने अपनी जमीन होने का दावा किया है। भास्कर से बातचीत में सरोज लकड़ा ने बताया कि उक्त जमीन 1939 में मेरे दादा ससुर ने खरीदी थी। मेरे पति राजेश जेराल्ड एक्का के नाम से रसीद कट रही है। गलत जमाबंदी करने में सिर्फ कर्मचारी की भूमिका नहीं है। बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके लिए मैं कोर्ट भी जाऊंगी। आगे क्या: नारायण मिस्त्री का नाम पंजी टू से हटेगा उप समाहर्ता प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि राजस्व रेकर्ड में मिलीभगत, जालसाजी कर किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से दर्ज कर दिया जाता है या रसीद कट जाती है तो भी उक्त भूमि पर कोई वैध मालिकाना हक प्राप्त नहीं होता। जालसाजी के आधार पर की गई जमाबंदी को प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। इसका अधिकार डीसीएलआर या अपर समाहर्ता के पास है।
मांडर जमीन घोटाला की जांच ईडी करेगा, सीओ ने राजस्वकर्मी पर कार्रवाई के लिए डीसी को लिखा
मांडर अंचल में 14.34 एकड़ सरकारी जमीन घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करेगा। जमीन घोटाले से जुड़े पहले से दर्ज ईसीआईआर में इस मामले को भी शामिल किया जाएगा। इधर, अंचल अधिकारी चंचला कुमारी ने राजस्व कर्मचारी पुना उरांव के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीसी मंजूनाथ भजंत्री को पत्र भेजा है। आरोप है कि मौजा हेसमी के खाता संख्या 152, प्लॉट संख्या 1163 की गैरमजरुआ सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से पंजी-2 में नारायण मिस्त्री के नाम दर्ज कर दिया गया। स्पष्टीकरण मांगे जाने पर कर्मचारी ने आरोपों से इनकार किया है।जमीन की दावेदार महिला आई सामने: रांची-लोहरदगा हाईवे स्थित इस बेशकीमती 14.34 एकड़ जमीन को मांडर की रहने वाली सरोज लकड़ा ने अपनी जमीन होने का दावा किया है। भास्कर से बातचीत में सरोज लकड़ा ने बताया कि उक्त जमीन 1939 में मेरे दादा ससुर ने खरीदी थी। मेरे पति राजेश जेराल्ड एक्का के नाम से रसीद कट रही है। गलत जमाबंदी करने में सिर्फ कर्मचारी की भूमिका नहीं है। बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके लिए मैं कोर्ट भी जाऊंगी। आगे क्या: नारायण मिस्त्री का नाम पंजी टू से हटेगा उप समाहर्ता प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि राजस्व रेकर्ड में मिलीभगत, जालसाजी कर किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से दर्ज कर दिया जाता है या रसीद कट जाती है तो भी उक्त भूमि पर कोई वैध मालिकाना हक प्राप्त नहीं होता। जालसाजी के आधार पर की गई जमाबंदी को प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। इसका अधिकार डीसीएलआर या अपर समाहर्ता के पास है।

