मुक्ति गैस एजेंसी दोबारा खुलने के बावजूद हजारों उपभोक्ताओं की परेशानी खत्म नहीं हुई है। जनवरी में एजेंसी बंद होने पर करीब 17 हजार ग्राहकों को उरांव, दैवी, बरियातू इंडेन और जयंत गैस एजेंसियों में शिफ्ट किया गया था। एक महीने पहले मुक्ति गैस एजेंसी दोबारा चालू हुई, लेकिन अब तक सिर्फ 7000 उपभोक्ताओं के कनेक्शन वापस आए हैं। करीब 10 हजार ग्राहक अब भी दूसरी एजेंसियों से जुड़े हैं। कई उपभोक्ताओं को कनेक्शन ट्रांसफर का मैसेज और बुकिंग की पुष्टि मिलने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा है। किसी को डीएसी नंबर के लिए दस-दस दिन इंतजार करना पड़ रहा है, तो किसी की बुकिंग डीएसी मिलने के बाद भी रद्द हो रही है। उपभोक्ता पुरानी और नई एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। मुक्ति गैस एजेंसी के प्रतिनिधि चंदन मिश्रा ने बताया कि तेल कंपनी ने अब तक 7000 उपभोक्ताओं को ही वापस शिफ्ट किया है। कुछ मामलों में गलत जानकारी और आधार डेटा लिंक नहीं होने से बुकिंग प्रभावित हो रही है। इसमें उपभोक्ताओं की गलती नहीं है। डेटा ट्रांसफर पूरा होने पर आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। वहीं, तेल कंपनी के अधिकारी के अनुसार, कनेक्शन चरणबद्ध तरीके से ट्रांसफर किए जाएंगे। एक-दो महीने डिलीवरी व्यवस्था की निगरानी के बाद शेष उपभोक्ताओं को शिफ्ट किया जाएगा। उपभोक्ताओं की परेशानी 1. ट्रांसफर और डीएसी नंबर मिलने के बाद भी सिलेंडर नहीं : एक उपभोक्ता ने बताया कि 14 अक्टूबर को मुक्ति गैस में कनेक्शन शिफ्ट होने का मैसेज आया। बुकिंग और डीएसी नंबर भी मिला, लेकिन मोबाइल नंबर ट्रांसफर नहीं होने की बात कहकर डिलीवरी से इनकार कर दिया गया। 2. दो बार बुकिंग रद्द, किसी एजेंसी से नहीं मिल रही गैस : एक अन्य उपभोक्ता के अनुसार, पहले उनका कनेक्शन मुक्ति से उरांव गैस में भेजा गया। अब वापस मुक्ति में शिफ्ट करने की बात कही जा रही है। डीएसी नंबर आने के बाद भी दो बार बुकिंग अपने आप रद्द हो गई। 3. मैसेज आया, लेकिन एजेंसी ने संपर्क नहीं किया : अभय कुमार ने बताया कि मुक्ति गैस में कनेक्शन ट्रांसफर होने का मैसेज मिला है, लेकिन एजेंसी की ओर से अब तक किसी ने संपर्क नहीं किया है।
