Monday, May 18, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

मेडिकल कचरे पर सख्त हुआ किशनगंज प्रशासन:अस्पतालों की होगी निगरानी, नियम तोड़ने पर 1 करोड़ तक जुर्माना, DM ने बनाई टीम


विशाल राज की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2016 को लेकर जिलास्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरकारी और निजी अस्पतालों में मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने डॉ. राज कुमार चौधरी को निर्देश दिया कि सभी सरकारी अस्पताल, निजी नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2016 का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों से निकलने वाला संक्रमित कचरा अगर सही तरीके से अलग, संग्रहित और निस्तारित नहीं किया गया तो इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है और पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान हो सकता है। नियमित निगरानी के लिए बनेगी टीम
जिलाधिकारी विशाल राज ने मेडिकल कचरे के प्रबंधन की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करने का निर्देश दिया। यह टीम जिले के स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी जगह नियमों के अनुसार कचरे का निस्तारण हो रहा है या नहीं। मेडिकल कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने जैव चिकित्सा अपशिष्ट की अलग-अलग श्रेणियों और उनके वैज्ञानिक निस्तारण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि येलो श्रेणी के कचरे का निस्तारण भस्मीकरण, प्लाज्मा पायरोलिसिस या गहरे गड्ढे में दफनाकर किया जाता है। वहीं रेड श्रेणी के कचरे का उपचार ऑटोक्लेव, माइक्रोवेव और रासायनिक कीटाणुशोधन प्रक्रिया से किया जाता है। उन्होंने कहा कि व्हाइट श्रेणी में आने वाले सुई और ब्लेड जैसे नुकीले कचरे को कीटाणुरहित कर सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाता है, जबकि ब्लू श्रेणी के कांच संबंधी अपशिष्टों को साफ और कीटाणुरहित करने के बाद रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। हर अस्पताल में नोडल अधिकारी होंगे तैनात
बैठक में यह भी बताया गया कि अब सभी स्वास्थ्य संस्थानों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी लाइसेंस लेने, समिति गठन और मेडिकल कचरे के प्रबंधन की नियमित निगरानी करने की होगी। नियम उल्लंघन पर लग सकता है भारी जुर्माना
सिविल सर्जन ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के अनुसार जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में हर महीने एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अब सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता जांच में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के मानकों को भी शामिल किया जाएगा। महिला नसबंदी सेवा के लिए निजी डॉक्टर होंगे इंपैनल
बैठक के दौरान जिला गुणवत्ता एवं यकीन समिति की भी समीक्षा की गई। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत महिला नसबंदी सेवा के लिए चार निजी चिकित्सकों को इंपैनल करने का निर्णय लिया गया। साथ ही चार निजी संस्थानों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया गया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles