Thursday, April 23, 2026

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मेयर चुनाव: रांची, धनबाद, मानगो, चास व आदित्यपुर में ही करीब 90 हजार वोट रद्द


सिर्फ रांची नगर निगम में 40 हजार वोट निरस्त झारखंड में 18 साल बाद बैलेट पेपर से हुए नगर निगम चुनाव में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। सिर्फ मेयर पद के लिए पड़े वोटों में से ही एक लाख से अधिक मतपत्र रिजेक्ट हो चुके हैं। रांची, धनबाद, जमशेदपुर (मानगो व आदित्यपुर) और बोकारो के चास नगर निगम में ही करीब 90 हजार वोट बेकार चले गए। अन्य नगर निगमों के आंकड़े जुड़ने पर यह संख्या एक लाख के पार पहुंच चुकी है। हालांकि प्रशासन ने अभी आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन अलग-अलग राउंड की काउंटिंग से जो स्थिति सामने आई है, वह चिंताजनक है। रांची में मेयर पद के लिए 4,45,922 वोट पड़े। पांच राउंड की गिनती में ही करीब 40 हजार वोट निरस्त होने की बात सामने आई। धनबाद में आठवें राउंड तक 4,27,535 वोटों की गिनती हुई, जिसमें 29,022 वोट रिजेक्ट हो गए। मानगो नगर निगम (जमशेदपुर): 90,857 वोटों में से 7,969 वोट अमान्य घोषित हुए। आदित्यपुर नगर निगम: 80,492 वोटों में से 7,121 वोट रिजेक्ट हुए। वहीं, चास नगर निगम में कुल 77,053 वोट पड़े, जिनमें 5,258 वोट खारिज हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ मेयर पद ही नहीं, बल्कि वार्ड पार्षद पद के लिए पड़े वोटों में भी करीब एक लाख से अधिक मतपत्र रिजेक्ट हुए हैं। सभी निकायों की विस्तृत रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग के पास पहुंचने के बाद वास्तविक समेकित आंकड़ा सामने आएगा। 1. ईवीएम से बैलेट पर लौटने से समझने में गलती हुई: लंबे समय से राज्य के मतदाता ईवीएम से मतदान के आदी थे। बैलेट पेपर पर सही स्थान पर मुहर लगाने की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त जानकारी का अभाव रहा। कई मतदाताओं ने गलत तरीके से मुहर लगा दी, जिससे उनके मतपत्र अमान्य कर दिए गए। 2. उम्मीदवारों की लंबी सूची, गलत बॉक्स में मुहर: कई नगर निगमों में मेयर पद के लिए बड़ी संख्या में प्रत्याशी मैदान में थे। इससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बनी। किसी ने नाम के सामने निर्धारित बॉक्स की जगह लाइन के ऊपर या नीचे मुहर लगा दी। रांची में रोशनी खलखो के नाम के सामने खाली स्थान था, जहां अधिकतर लोगों ने मुहर लगा दी। निर्धारित स्थान से बाहर लगी मुहर के कारण बड़ी संख्या में वोट रिजेक्ट हो गए। 3. जागरूकता अभियान के लिए पहल नहीं हुई: राज्यभर में प्रशासन की ओर से बैलेट पेपर से मतदान को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया। बूथ स्तर पर भी मतदाताओं को प्रक्रिया समझाने की विशेष पहल नजर नहीं आई। इसका असर यह हुआ कि कई मतदाताओं को सही तरीके से मतदान की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई।

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