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पटना में हनुमान मंदिर परिसर से 19 दिन पहले 3 साल की बच्ची अंशु लापता हुई थी। उसका अभी तक कुछ पता नहीं चला है। परिजन और स्थानीय वार्ड पार्षद श्वेता रंजन पुलिस की कार्यशाली पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस लापरवाही बरत रही है। पुलिस मुकम्मल कार्रवाई नहीं कर रही है। परिजन खुद पटना शहर में बच्ची की तस्वीर का पंपलेट लगा रहे हैं। जो पुलिस की उदासीनता को दर्शाता है। पंपलेट पर फोटो के साथ लिखा है, बच्ची 4 अप्रैल की शाम से लापता है। किसी भाई-बहन को मिले तो पटना जंक्शन महावीर मंदिर पर पहुंचाने का कष्ट करें…। श्वेता रंजन ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि वरीय अधिकारियों को इसपर संज्ञान लेना चाहिए। हमलोग इसके खिलाफ हैं। बच्ची की सकुशल बरामदी होनी चाहिए। मामला कोतवाली थाने से जुड़ा है। महिला सिपाही की मदद से थाने पहुंची थी पीड़िता गुमशुदगी के 15 दिन के बाद 18 अप्रैल को एक महिला ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल की मदद से पीड़ित परिजन कोतवाली थाने पहुंचे थे। काफी जद्दोजहद के बाद थाने ने पीड़िता के आवेदन को एक्सेप्ट किया था। बच्ची की नानी मीना देवी ने बताया था कि 4 अप्रैल की शाम लगभग 6:00 बजे अंशु अपनी मां नितु कुमारी के साथ महावीर मंदिर पूजा के लिए गई थी। इसी दौरान मंदिर परिसर के आसपास से गुमशुदा हो गई। हमलोग जीआरपी थाने गए। वहां पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद वहां से कोतवाली थाने भेज दिया गया। नानी के मुताबिक कोतवाली थाने पहुंचने पर बच्ची की गुमशुदगी से संबंधित एविडेंस मांगे गए, नहीं होने पर लौटा दिया गया। 15 दिनों तक अपने स्तर से खोजबीन की। इसी बीच एक महिला ट्रैफिक कांस्टेबल को घटना के बारे में जानकारी मिली। उसने पूरी मदद की।
थाने में गुमशुदगी का प्रुफ मांगा गया था बच्ची के परिजन के मुताबिक कोतवाली थाने में गुमशुदगी से संबंधित एविडेंस मांगे गए, पर परिजन के पास आवेदन के अलावा कुछ नहीं था। इस कारण पुलिस वालों ने लौटा दिया था। इसलिए परिजन ने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) को आवेदन देकर सीसीटीवी उपलब्ध कराने को कहा था। बच्ची की नानी ने कहा कि था ये काम तो पुलिस को करनी चाहिए, पर हमें कहा जा रहा है। लापता अंशु कोतवाली इलाके के कमला नेहरू नगर की रहने वाली है।

