Wednesday, September 30, 2026
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मोतिहारी में गंडक की बाढ़ में डूबा केसरिया का दियारा:घरों में घुसा पानी, तटबंध पर प्लास्टिक तानकर रात काट रहे लोग; 7 कम्यूनिटी किचन चलाने का निर्देश


पूर्वी चंपारण में सोमवार रात तक सबकुछ सामान्य था। गांव में लोग अपने-अपने घरों में थे। रात में अचानक गंडक का पानी बढ़ने लगा। पहले गलियों में पानी आया, फिर आंगन डूबा और देखते ही देखते कई घरों में पानी घुस गया। लोग बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को लेकर घरों से बाहर निकलने लगे। किसी ने अनाज बचाया तो किसी ने कपड़े और जरूरी सामान समेटे। जिनके पास जाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं थी, उन्होंने चंपारण तटबंध का रुख किया। अब तटबंध पर प्लास्टिक शीट तानकर परिवार रात गुजार रहे हैं। यह तस्वीर पूर्वी चंपारण के केसरिया प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों की है। गंडक के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी से ढेकहां पंचायत के वार्ड 8, 9, 10 और 11 तथा कढ़ान पंचायत के वार्ड 3, 9 और 10 में हालात गंभीर हो गए हैं। कई घर पानी से घिर गए हैं, जबकि निचले इलाकों के घरों में पानी प्रवेश कर चुका है। सड़क और गलियों में पानी भरने से आवागमन भी प्रभावित है। लोगों के सामने भोजन, पीने के पानी, रहने की जगह और मवेशियों के चारे का संकट खड़ा हो गया है। पहले बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें देखिए… रातोंरात बदले हालात, बच्चों को लेकर घर छोड़ना पड़ा ढेकहां के लक्ष्मी देवी, सुनील देवी, योगेंद्र सहनी, शंभू पासवान, रामाधार महतो, रवींद्र महतो, शंकर सहनी, नरेश पासवान और नागेंद्र सहनी समेत ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार रात तक पानी की स्थिति सामान्य थी। इसके बाद अचानक जलस्तर बढ़ने लगा। कुछ ही देर में गांव की गलियों और घरों के आसपास पानी फैल गया। पानी बढ़ता देख परिवारों ने सबसे पहले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद घर में रखा अनाज, कपड़े और दूसरे जरूरी सामान निकालने की कोशिश की। लेकिन पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कई लोगों को सामान समेटने का पूरा मौका तक नहीं मिला। ग्रामीणों के मुताबिक, जिन घरों में पानी घुस गया है, वहां चूल्हा-चौका करना मुश्किल है। घर में रखा सामान भी पानी से खराब हो रहा है। कई जगहों पर चापाकल भी पानी में डूब गए हैं। ऐसे में लोगों के सामने पीने के साफ पानी की समस्या भी खड़ी हो गई है। घर में पानी, तटबंध पर प्लास्टिक की छत बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ी समस्या अब रात गुजारने की है। जिनके घर पानी से घिर चुके हैं, वे ऊंचे स्थानों की तलाश में हैं। बड़ी संख्या में लोग चंपारण तटबंध पर पहुंच गए हैं। यहां परिवारों ने प्लास्टिक शीट तानकर अस्थायी ठिकाना बनाया है। कहीं प्लास्टिक के नीचे बच्चे बैठे हैं तो कहीं महिलाएं घर से बचाकर लाया सामान समेटे हैं। बुजुर्गों के लिए भी तटबंध पर रात गुजारना मुश्किल है। बारिश और पानी के बीच खुले में रहने से बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि घर में रहना मुश्किल है, लेकिन तटबंध पर भी स्थायी व्यवस्था नहीं है। प्रशासन से उनकी मांग है कि उन्हें सुरक्षित जगह, भोजन, पीने का पानी और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। ‘लोगों को बांध बचाने के लिए बालू की बोरियां तक नहीं मिलीं’ कांग्रेस जिलाध्यक्ष गप्पू राय ने प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि समय रहते तटबंध को बचाने के लिए जरूरी काम और सामग्री उपलब्ध कराई जाती तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि वे सुबह से बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। मिश्रणिया पंचायत में भी तटबंध की स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार, वहां भी तटबंध को बचाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। गप्पू राय ने वाटर रिसोर्सेज विभाग के एक अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि ग्रामीणों को बांध बचाने के लिए बालू की बोरियां उपलब्ध कराने में परेशानी हुई। उन्होंने इस मामले में प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। ‘हर चुनाव में वादा, लेकिन बांध बचाने के समय नहीं मिली बोरी’ ग्रामीण राजेश कुमार यादव ने कहा, हमलोग सदियों से बाढ़ प्रभावित इलाके में रह रहे हैं। हर बार चुनाव के समय उम्मीदवार आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं। इस बार भी जब बांध टूटने की स्थिति बनी तो हमने अधिकारियों से बालू की बोरियां मांगी थीं। लेकिन हमें एक भी बोरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते तटबंध को बचाने के लिए जरूरी सामग्री मिल जाती और काम कराया जाता तो शायद स्थिति इतनी खराब नहीं होती। राजेश के मुताबिक, अब पानी गांव में फैल चुका है और कई घरों में करीब पांच फीट तक पानी पहुंच गया है। लोगों को घर-बार छोड़कर दूसरी जगह जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। अरेराज में दो तटबंध टूटने से भी बढ़ी चिंता पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड में मंगलवार को दो तटबंध टूटने की सूचना से भी आसपास के रिहायशी इलाकों में चिंता बढ़ गई। पानी निचले इलाकों की ओर फैलने लगा है। केसरिया के प्रभावित इलाकों में पहले से गंडक के बढ़े जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। कढ़ान पंचायत के वार्ड 9 और 10 में बाढ़ का असर ज्यादा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह इलाका पहले से बाढ़ की मार झेलता रहा है। अचानक जलस्तर बढ़ने के बाद इस बार भी लोगों के सामने घर और मवेशियों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। पानी बढ़ने से कई जगहों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। ऐसे में नाव लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन बनी हुई है। परिवार अपने बच्चों और जरूरी सामान के साथ नाव के जरिए सुरक्षित जगहों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। मवेशियों को भी पानी से निकालकर ऊंचे स्थानों पर ले जाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की चिंता सिर्फ घर तक सीमित नहीं है। मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी और बढ़ा तो चारे और पीने के पानी का संकट और गहरा सकता है। 7 सामुदायिक रसोई शुरू करने का निर्देश बाढ़ की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को चकिया एसडीओ शिवानी शुभम और केसरिया बीडीओ कुमुद कुमार ने ढेकहां और कढ़ान पंचायत के प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। लोगों से ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील भी की गई। चकिया एसडीओ ने ढेकहां पंचायत में 5 और कढ़ान पंचायत में 2, यानी कुल 7 सामुदायिक रसोई तत्काल शुरू कराने का निर्देश दिया। इन रसोइयों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित परिवारों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को पॉलीथिन शीट और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। 10 से ज्यादा नावें राहत कार्य में लगाई गईं प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही और राहत कार्य के लिए 10 से अधिक नावें चलाए जाने की जानकारी दी गई है। इनके जरिए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों को सूचना देने की अपील की है। फिलहाल गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी से तटवर्ती गांवों में लोगों की चिंता बनी हुई है। एक तरफ घरों में पानी घुसने से रोजमर्रा की जिंदगी ठप है, दूसरी तरफ सुरक्षित ठिकाने की तलाश में परिवार तटबंधों पर पहुंच रहे हैं। प्लास्टिक की चादर के नीचे बच्चों के साथ गुजरती रातें बता रही हैं कि यहां बाढ़ सिर्फ खेतों और रास्तों में नहीं, बल्कि लोगों के घर और जिंदगी तक पहुंच चुकी है।

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