Monday, October 5, 2026
⚡

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

म्यांमार की सुपारी से असम से यूपी तक फल-फूल रहा तस्करी का सिंडिकेट, जानें बिहार का रूट क्यों बना बड़ा अड्डा

पटना से आशुतोष दीक्षित की रिपोर्ट

म्यांमार से सुपारी तस्करी का नेटवर्क पूर्वोत्तर से लेकर उत्तर भारत तक काम कर रहा है. एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि तस्करी की सुपारी मिजोरम के चंफाई-जोकावथर क्षेत्र से भारत में प्रवेश कराने के बाद असम, पश्चिम बंगाल और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली तक भेजी जा रही है. जांच में यह भी पता चला है कि मिजोरम, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली में सक्रिय आपूर्तिकर्ताओं, फाइनेंसरों, खरीदारों और लॉजिस्टिक ऑपरेटरों का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है.

मुख्य बातें

  • सस्ते विदेशी माल को भारतीय बाजार में खपाने के लिए फर्जी दस्तावेज और जीएसटी नेटवर्क का इस्तेमाल.
  • जांच एजेंसियों की कार्रवाई में सामने आया संगठित सिंडिकेट.
  • एक ट्रक पर 1 करोड़ का मुनाफा: मिजोरम से दिल्ली तक फैली सुपारी तस्करी की नेटवर्क रिपोर्ट.
  • फर्जी ई-वे बिल से करोड़ों का टैक्स चोरी खेल, जानिए पूर्वोत्तर से दिल्ली तक कैसे पहुंच रहा माल.

सरकारी राजस्व को नुकसान

पूर्वोत्तर से निकलने के बाद सुपारी की खेप कारोबारी नेटवर्क से जुड़कर आगे ले जायी जा रही है. तस्करी के खिलाफ ताजा बड़ी कार्रवाई में डीआरआई ने 23-24 सितंबर को मिजोरम और असम में कुल 1,25,680 किलो सुपारी जब्त भी की. इस सुपाड़ी को भी बिहार रूट से उत्तर प्रदेश और दिल्ली ले जाया जाना था. जांच में सामने आया है कि सस्ते विदेशी माल को भारतीय बाजार में ऊंचे दाम पर बेचने से तस्करों और बिचौलियों को बड़ा मुनाफा मिलता है. फर्जी बिलिंग और दस्तावेजों के जरिए माल को वैध कारोबार का रूप देने की कोशिश से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.

फर्जी कागजात से टैक्स चोरी का खेल

कस्टम विभाग भी इस नेटवर्क को तोड़ने में लगा है. कस्टम की जांच में केवल सीमा पार तस्करी ही नहीं, बल्कि माल को वैध दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेजों और जीएसटी से जुड़े रिकॉर्ड के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं. एजेंसी के अनुसार, सुपारी की आवाजाही के लिए एसजीएसटी और सीजीएसटी से संबंधित ई-वे बिल कथित तौर पर फर्जी तरीके से जारी किए गए जा रहे हैं. इनमें फर्जी प्लांटेशन सर्टिफिकेट और कस्टम क्लीयरेंस दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है.

बिहार की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

मुनाफे के खेल को ऐसे समझें

कस्टम के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक, विदेशी सुपाड़ी का मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (MIP) 351 रुपये निर्धारित है. अगर इसे नियमानुसार लाया जाता है तो 100 फीसदी (351 रुपये) कस्टम ड्यूटी और 18 प्रतिशत जीएसटी (करीब 61 रुपये रुपये) चुकाना होता है. इससे सुपाड़ी की कीमत 763 रुपये हो जाती है. इसके अलावा, म्यांमार की सीमा से लखनऊ, कानपुर तक का भाड़ा करीब एक लाख रुपये है.

एक ट्रक में करीब 30 टन आता है माल

एक ट्रक में करीब 30 टन यानी 30,000 किलो माल आता है. इस हिसाब से गंतव्य तक पहुंचते-पहुंचते सुपारी 770 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. तस्करी कर लाई गई सुपाड़ी में कस्टम और जीएसटी की टेंशन नहीं होती, यानी इसकी कीमत साढ़े तीन सौ रुपये प्रति किलो के आसपास ही रह जाती है. 30 टन की बात करें तो एक ट्रक पर बचत ही एक करोड़ रुपये से ज्यादा की होती है. इसी मुनाफे के लिए यह खेल किया जा रहा है.

Also Read: IRCTC Scam: राउज एवेन्यू कोर्ट में हाजिर हुए लालू-राबड़ी-तेजस्वी, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में टली सुनवाई

The post म्यांमार की सुपारी से असम से यूपी तक फल-फूल रहा तस्करी का सिंडिकेट, जानें बिहार का रूट क्यों बना बड़ा अड्डा appeared first on Prabhat Khabar.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles