बिहारशरीफ (नालंदा) से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Rugby Players : बिहार से जुड़े क्रिकेटर आकाशदीप और मुकेश कुमार को सरकार ने हाल में ही सीधे प्रशासनिक सेवा अधिकारी बनाया है. उन्हें मिली इस उपलब्धि ने बिहार के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए और ज्यादा प्रेरित किया है. हम जानते हैं कि क्रिकेट में राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना और प्रदर्शन करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है! इसलिए आज हम आपको क्रिकेट की ही तरह एक और ऐसे विदेशी खेल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बिहार के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का सबसे नया और सफल रास्ता बन चुका है.
बिहार के युवाओं को यह खेल दे रहा सरकारी नौकरी
ब्रिटेन की धरती से बिहार आया ‘रग्बी’ आज यहां के युवाओं को पहचाने के साथ ही सरकारी नौकरी के रास्ते भी दिखा रहा है. ग्रामीण इलाकों की पगडंडियों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराने वाले युवा खिलाड़ी आज खेल कोटा के तहत बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर से लेकर विभिन्न सरकारी विभागों में लिपिक (क्लर्क) के पदों पर तैनात हो रहे हैं. विशेष रूप से नालंदा और राजगीर इस खेल के सबसे बड़े हब बनकर उभरे हैं. आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 से अब तक जिले के पांच खिलाड़ियों को खेल कोटा के तहत सरकारी नौकरी मिली है. इनमें तीन खिलाड़ियों को बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर तथा दो खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में निम्न वर्गीय लिपिक के पद पर नियुक्ति मिली है.
पहले जानिए, कैसे मिल रही है सरकारी नौकरी
बिहार सरकार की ‘बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति नियमावली’ के तहत ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना चलाई जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को बिना किसी लिखित परीक्षा या इंटरव्यू के सीधे उनके पदक (स्वर्ण, रजत या कांस्य) के आधार पर सरकारी नौकरी देना है. इस नीति के तहत ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के शीर्ष पदक विजेताओं को सीधे बिहार प्रशासनिक सेवा (SDM) और बिहार पुलिस सेवा (DSP) जैसे प्रथम श्रेणी (लेवल-9) के पदों पर नियुक्त करने का प्रावधान है, जबकि राष्ट्रीय, विश्वविद्यालय और स्कूल गेम्स के खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन के अनुसार बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (SI), लिपिक (Clerk) और अन्य सरकारी पदों पर सीधी बहाली दी जा रही है ताकि उन्हें भविष्य की चिंता किए बिना खेल में आगे बढ़ने की आर्थिक सुरक्षा मिल सके.
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एक ही जिले से निकले पांच उदाहरण
दिलचस्प बात यह है कि खेल कोटा से नौकरी पाने वाले अधिकतर खिलाड़ी नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड के अलग-अलग गांवों से हैं. इनमें भदारी गांव की अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी श्वेता शाही, बड़गांव की धर्मशीला कुमारी, बिंदुपुर की प्रियंका कुमारी, मुजफ्फरपुर गांव के राजू कुमार तथा धरहरा गांव की चुनचुन कुमारी शामिल हैं.
इन खिलाड़ियों की सफलता ने सिलाव प्रखंड को बिहार में रग्बी की नई नर्सरी के रूप में पहचान दिलाई है. स्थानीय खेल प्रशिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के खिलाड़ियों ने जिस तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई है, वह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है.

Bihar Rugby Players की उपलब्धियों ने ऐसे दिलाई सरकारी नौकरी
भदारी गांव की श्वेता शाही को वर्ष 2022 में खेल कोटा के तहत बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति मिली थी. उनकी पहली पदस्थापना पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में हुई थी. वर्तमान में वे मुजफ्फरपुर सदर थाना में कार्यरत हैं. श्वेता ने एशियाई खेलों सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है.
बड़गांव निवासी धर्मशीला कुमारी ने भी रग्बी में शानदार प्रदर्शन के बल पर बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर का पद हासिल किया. वर्तमान में वे नवादा जिले में पदस्थापित हैं. धर्मशीला ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर कई पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई है.
बिंदुपुर गांव की प्रियंका कुमारी को भी खेल कोटा के तहत बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर की नौकरी मिली. वर्तमान में उनकी तैनाती वैशाली जिले में है.
वहीं मुजफ्फरपुर गांव के राजू कुमार को निम्न वर्गीय लिपिक के पद पर नियुक्ति मिली और उनकी प्रतिनियुक्ति राजगीर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में की गई है.
धरहरा गांव की चुनचुन कुमारी को भी खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी सेवा मिली. वर्तमान में वे नूरसराय में राजस्व विभाग में निम्न वर्गीय लिपिक के रूप में कार्यरत हैं.
इन खिलाड़ियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि खेल अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मानजनक रोजगार और सुरक्षित भविष्य का भी मजबूत आधार बन चुका है.

धर्मशीला कुमारी बनीं ग्रामीण बेटियों की प्रेरणा
बड़गांव निवासी धर्मशीला कुमारी की सफलता आज ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है. उन्होंने वर्ष 2019 में चंडीगढ़ में आयोजित जूनियर राष्ट्रीय रग्बी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अपने करियर की शुरुआत की थी. वर्ष 2022 उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ. पटना में आयोजित जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप और सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप दोनों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर बिहार का गौरव बढ़ाया. इसके बाद उज़्बेकिस्तान में आयोजित एशियाई रग्बी अंडर-18 चैंपियनशिप और नेपाल में आयोजित एशियाई रग्बी अंडर-20 चैंपियनशिप में भारतीय टीम के साथ रजत पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई.
उन्होंने गुजरात में आयोजित 36वें राष्ट्रीय खेलों में कांस्य पदक, गोवा में आयोजित 37वें राष्ट्रीय खेलों में रजत पदक तथा उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में भी रजत पदक हासिल किया. वर्ष 2026 में ओडिशा में आयोजित अस्मिता सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी उन्होंने रजत पदक जीतकर अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखा.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर लहराया नालंदा का परचम
नालंदा के खिलाड़ियों ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर जिले को वैश्विक पहचान दिलाई है. दिसंबर 2022 में नेपाल के काठमांडू में आयोजित एशिया रग्बी अंडर-18 गर्ल्स एवं बॉयज चैंपियनशिप में जिले के खिलाड़ियों ने भारतीय टीम का हिस्सा बनकर शानदार प्रदर्शन किया. इसके बाद सितंबर-अक्टूबर 2023 में ताइवान के ताओयुआन में आयोजित एशिया रग्बी अंडर-18 चैंपियनशिप में भी नालंदा के खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया. इन प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई.
वर्ष 2024 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित फिसू वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रग्बी-7 चैंपियनशिप में भी जिले के खिलाड़ियों ने भारतीय टीम में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिल रही सफलता ने नालंदा को बिहार के प्रमुख रग्बी केंद्रों में शामिल कर दिया है.
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कायम है दबदबा
राष्ट्रीय स्तर पर भी नालंदा के खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है. जून 2022 में आयोजित जूनियर नेशनल रग्बी अंडर-18 चैंपियनशिप में खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर बिहार का नाम रोशन किया. इसके बाद जून 2023 में भी इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता कायम रखी. खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2023 में खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक हासिल किया. वहीं खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 में रजत पदक जीतकर अपनी निरंतरता बनाए रखी. अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय (एआईयू) प्रतियोगिता 2023 और 2024 में भी खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर नालंदा की पहचान मजबूत की.
कई और खिलाड़ियों को नौकरी मिलने की उम्मीद
खेल जगत से जुड़े लोगों के अनुसार जिले के दो अन्य रग्बी खिलाड़ियों ने भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. उनकी उपलब्धियां खेल कोटा के मानकों के अनुरूप मानी जा रही हैं. ऐसे में आने वाले समय में उन्हें भी सरकारी नौकरी मिलने की संभावना जताई जा रही है. यदि ऐसा होता है तो जिले में खेलों के प्रति युवाओं का उत्साह और बढ़ेगा.
स्थानीय खेल प्रशिक्षकों का कहना है कि सरकारी नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों की सफलता ने नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाया है. अब युवा यह समझने लगे हैं कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर खेलों में भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालंदा के खिलाड़ियों ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती. सही मार्गदर्शन, मेहनत और अवसर मिलने पर गांवों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता के झंडे गाड़ सकती हैं. आज नालंदा के रग्बी खिलाड़ी न केवल जिले का गौरव हैं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उनकी सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि खेल के मैदान से निकलकर भी जीवन की बड़ी मंजिलें हासिल की जा सकती हैं.
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