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जमुई व्यवहार न्यायालय में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित पांच सांसदों के खिलाफ एक परिवाद दायर किया गया है। यह परिवाद संसद परिसर में नाट्य प्रदर्शन को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में दाखिल किया है। मामले को परिवाद वाद संख्या 1004/2026 के रूप में दर्ज किया गया है। मामले में सांसदों को बनाया पक्षकार परिवाद में राहुल गांधी के अलावा पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, उत्तर प्रदेश के फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद, मुरादाबाद से सांसद रुचि वीरा और आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव को पक्षकार बनाया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने आरोप लगाया है कि सांसदों द्वारा संसद परिसर में किए गए कथित नाट्य प्रदर्शन से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि जिस मामले को लेकर यह प्रदर्शन किया गया, वह अभी जांच के अधीन है। अधिवक्ता के अनुसार, उस मामले का मुख्य अभियुक्त कोई साधु-संत नहीं, बल्कि रामाशंकर यादव है, इसलिए इस तरह का प्रदर्शन अनुचित था। एसआईटी कर रही जांच,सार्वजनिक प्रदर्शन रंजन ने यह भी बताया कि संबंधित मामले की जांच सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है और यह न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। ऐसे समय में सार्वजनिक प्रदर्शन कर मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सांसदों ने इस प्रदर्शन के माध्यम से स्वयं को सुर्खियों में लाने का प्रयास किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अन्य समुदायों से जुड़े मामलों में ऐसा प्रदर्शन होता तो उसकी प्रतिक्रिया भिन्न होती। उनके अनुसार, सनातन धर्म के अनुयायियों की सहिष्णुता का लाभ उठाकर यह प्रदर्शन किया गया। यह परिवाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में दायर किया जा चुका है। अदालत अब इस पर सुनवाई करेगी और आगे की न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित करेगी। मामले में अभी न्यायालय की ओर से कोई निर्णय नहीं आया है, इसलिए आरोपों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

