सिटी रिपोर्टर | बोकारो गर्मी बढ़ने के साथ जिले के बाजार आम और लीची की खुशबू से महक रहा है। मंडियों में आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आम-लीची की भरपूर आवक हो रही है, लेकिन इसका फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है। थोक बाजार में पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद खुदरा बाजार में आम 100 रुपए तक और लीची 150 रुपए प्रति किलो बिक रही है। नतीजतन, सीजनल फलों की मिठास इस बार आम लोगों की पहुंच से कुछ दूर नजर आ रही है। मंडी कारोबारियों के अनुसार फिलहाल गुलाबखास, बेनापल्ली समेत कई किस्मों के आम की आवक आंध्र प्रदेश से हो रही है। वहीं, लंगड़ा और जरदालू का ओिडशा से भी आवक हो रही है। जबकि लीची का बड़ा हिस्सा बंगाल से आ रहा है। हालांकि कई दुकानदार बंगाल और ओडिशा के आमों को भी भागलपुर का लंगड़ा आम बताकर बेच रहे हैं। स्वाद और गुणवत्ता में अंतर होने के बावजूद ग्राहक नाम देखकर खरीदारी कर रहे हैं। भागलपुरी लंगड़ा व लीची के नाम पर बिक रहे बाहरी फल आम और लीची के सीजन में बाजार फलों से भरे हुए हैं, लेकिन इनमें बड़ी मात्रा में दूसरे राज्यों से आने वाले फल बिक रहे हैं। जबकि बाजार में उपलब्ध अधिकांश आम आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आ रहे हैं। कई दुकानदार इन आमों को भागलपुर के प्रसिद्ध लंगड़ा आम के नाम से बेच रहे हैं, जबकि असली भागलपुरी लंगड़ा की आवक अभी काफी कम है। इससे ग्राहकों के लिए असली और बाहरी फल में अंतर कर पाना मुश्किल हो रहा है। वहीं लीची बाजार में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। पश्चिम बंगाल से आने वाली लीची आकार में बड़ी और रंग में अधिक गहरी होने के कारण ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। दूसरी ओर बिहार की प्रसिद्ध लीची की आवक फिलहाल सीमित बनी हुई है।
रिकॉर्ड आवक के बावजूद खुदरा बाजार में आम 100 व लीची 150 रु. किलो बिक रही
सिटी रिपोर्टर | बोकारो गर्मी बढ़ने के साथ जिले के बाजार आम और लीची की खुशबू से महक रहा है। मंडियों में आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आम-लीची की भरपूर आवक हो रही है, लेकिन इसका फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है। थोक बाजार में पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद खुदरा बाजार में आम 100 रुपए तक और लीची 150 रुपए प्रति किलो बिक रही है। नतीजतन, सीजनल फलों की मिठास इस बार आम लोगों की पहुंच से कुछ दूर नजर आ रही है। मंडी कारोबारियों के अनुसार फिलहाल गुलाबखास, बेनापल्ली समेत कई किस्मों के आम की आवक आंध्र प्रदेश से हो रही है। वहीं, लंगड़ा और जरदालू का ओिडशा से भी आवक हो रही है। जबकि लीची का बड़ा हिस्सा बंगाल से आ रहा है। हालांकि कई दुकानदार बंगाल और ओडिशा के आमों को भी भागलपुर का लंगड़ा आम बताकर बेच रहे हैं। स्वाद और गुणवत्ता में अंतर होने के बावजूद ग्राहक नाम देखकर खरीदारी कर रहे हैं। भागलपुरी लंगड़ा व लीची के नाम पर बिक रहे बाहरी फल आम और लीची के सीजन में बाजार फलों से भरे हुए हैं, लेकिन इनमें बड़ी मात्रा में दूसरे राज्यों से आने वाले फल बिक रहे हैं। जबकि बाजार में उपलब्ध अधिकांश आम आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आ रहे हैं। कई दुकानदार इन आमों को भागलपुर के प्रसिद्ध लंगड़ा आम के नाम से बेच रहे हैं, जबकि असली भागलपुरी लंगड़ा की आवक अभी काफी कम है। इससे ग्राहकों के लिए असली और बाहरी फल में अंतर कर पाना मुश्किल हो रहा है। वहीं लीची बाजार में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। पश्चिम बंगाल से आने वाली लीची आकार में बड़ी और रंग में अधिक गहरी होने के कारण ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। दूसरी ओर बिहार की प्रसिद्ध लीची की आवक फिलहाल सीमित बनी हुई है।

