Thursday, June 18, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

रिटायरमेंट के बाद ‘मास्टर साहब’ बने किसान:खाली बैठना नहीं आया रास, चतरा में 7 एकड़ बंजर जमीन पर उगा रहे केला, ड्रैगन फ्रूट


चतरा जिले के सुदूरवर्ती प्रतापपुर प्रखंड के बिरमातकुम गांव से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। 65 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक विजय राम चंद्रवंशी ने रिटायरमेंट के बाद आराम करने के बजाय खेतों में पसीना बहाने का रास्ता चुना। साल 2019 में नौकरी से मुक्त होने के बाद उन्होंने तय किया कि वे खुद को निष्क्रिय नहीं होने देंगे। इसी सोच ने उन्हें खेती की ओर मोड़ा और आज वे ‘खेती की पाठशाला’ चला रहे हैं। उनका मानना है कि जीवन के हर पड़ाव पर कुछ नया सीखना और करना ही असली सफलता है। खेती से जुड़ी तस्वीरें देखें… 7 एकड़ बंजर जमीन को उपजाऊ खेत में बदला विजय राम ने बिना समय गंवाए 7 एकड़ बंजर और झाड़ियों से भरी जमीन को सालाना 2.5 लाख रुपए पर लीज पर लिया। शुरुआत में यह जमीन पूरी तरह अनुपजाऊ थी, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया। दिन-रात की मेहनत, सही योजना और लगन से उन्होंने इस जमीन को एक हरे-भरे बागान में बदल दिया। आज यहां केले, ड्रैगन फ्रूट, कटहल, सहजन जैसे कई फलों और सब्जियों की भरपूर खेती हो रही है। उनकी यह मेहनत अब आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। यूट्यूब-व्हाट्सएप से सीखा मिक्स फार्मिंग खेती की कोई औपचारिक ट्रेनिंग न होने के बावजूद विजय राम ने हार नहीं मानी। उन्होंने यूट्यूब और व्हाट्सएप के जरिए कृषि विशेषज्ञों से जानकारी हासिल की और एक प्रशिक्षित सहयोगी के साथ मिलकर मिक्स फार्मिंग का मॉडल तैयार किया। पश्चिम बंगाल से पौधे मंगवाए और वैज्ञानिक तरीके से रोपण किया। आज उनके खेत में 1000 से अधिक केले के पौधे, 3000 ड्रैगन फ्रूट, 1500 ओल (जिमीकंद) और 400 कटहल के पेड़ लहलहा रहे हैं। इसके अलावा सहजन, हल्दी, अदरक और परवल की भी खेती हो रही है। जैविक खेती और सोलर सिंचाई बना खास पहचान इस खेती की सबसे खास बात यह है कि यहां पूरी तरह जैविक तरीके अपनाए जाते हैं। विजय राम खुद गोबर, जीवामृत और वर्मी कंपोस्ट से खाद तैयार करते हैं। रासायनिक उर्वरकों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी गई है। सिंचाई के लिए उन्होंने सोलर पैनल का इस्तेमाल किया है, जिससे लागत कम होती है। पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। महज एक साल में कई फसलों में फल आने लगे हैं। उन्हें सालाना लाखों की कमाई की उम्मीद है। इस पहल से 8 से 10 स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला है। सरकारी नौकरी में बेटे, फिर भी पिता का दे रहे साथ दिलचस्प बात यह है कि विजय राम के चारों बेटे सरकारी सेवा में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। कोई इंजीनियर है, कोई पुलिस में, कोई शिक्षक तो कोई कंप्यूटर इंजीनियर। बावजूद इसके, वे छुट्टियों में गांव आकर पिता के इस काम में हाथ बंटाते हैं। विजय राम का यह मॉडल अब पूरे चतरा जिले के लिए मिसाल बन गया है। उनकी ‘दूसरी पाठशाला’ युवाओं को यह संदेश दे रही है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो बंजर जमीन से भी सोना उगाया जा सकता है और गांव में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles