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बारिश के मौसम में राजधानी में बुखार, वायरल संक्रमण, उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर रिम्स की ओपीडी पर दिख रहा है। संस्थान के मेडिसिन और चाइल्ड ओपीडी में रोजाना 400 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें करीब 60 प्रतिशत मरीज मौसमी व वायरल बीमारियों से पीड़ित हैं। बीते 7 दिनों में ही दोनों विभागों में 2200 से अधिक मरीज पहुंचे, जिनमें लगभग 1300 वायरल की चपेट में थे। मरीजों के भारी दबाव के बीच रिम्स के ओपीडी दवा वितरण केंद्र में जरूरी दवाओं का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र में एंटीबायोटिक, दर्द, एलर्जी और आंखों की दवाओं के साथ-साथ कफ सिरप और बच्चों का पैरासिटामोल ड्रॉप तक आउट ऑफ स्टॉक है। गरीब और मध्यमवर्गीय मरीज महज 10 रुपये की पर्ची पर इस उम्मीद से आते हैं कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवाएं मिलेंगी। लेकिन काउंटर से दवाएं नदारद होने के कारण उन्हें निजी मेडिकल दुकानों से हजारों रुपये खर्च कर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। गरीबों को मजबूरी में बाहर से हजारों रुपए की दवा खरीदनी पड़ रही ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज जब दवा वितरण केंद्र पहुंचते हैं तो पर्ची की कई दवाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में मरीजों के सामने दो ही विकल्प बचते हैं दवा छोड़ दें या फिर निजी मेडिकल स्टोर से खरीदें। गरीब और दूर-दराज से इलाज कराने रिम्स आने वाले मरीजों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। कई मरीजों को यह उम्मीद रहती है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी दवाएं मुफ्त मिल जाएंगी। लेकिन दवा नहीं मिलने पर उन्हें निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है। वार्डों में भर्ती मरीज भी परेशान दवाओं की कमी का असर केवल ओपीडी मरीजों तक सीमित नहीं है। वार्डों में भर्ती मरीजों को भी दवाओं की उपलब्धता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों के परिजनों को भी कई बार बाहर से दवाएं और अन्य जरूरी सामान खरीदना पड़ता है। रिम्स में बड़ी संख्या में राज्य के अलग-अलग जिलों से मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में दवा वितरण व्यवस्था में कमी का असर सीधे मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ता है। ये 22 दवाएं रिम्स में नहीं 1. एमोक्सिसिलिन 500 एमजी 2. एमोक्सिसिलिन+क्लेवुलोनेट 625 एमजी 3. इट्राकोनाजोल 4. लेवोसेटिरिजिन 10 एमजी 5. कफ सिरप 6. मोक्सीफ्लोक्सासिन+डेक्सामेथासोन आई ड्रॉप 7. कार्बोक्सीमिथाइलसेलुलोज 0.5% 8. ओलोपटाडाइन 9. डिक्लोफेनैक 50 एमजी 10. ट्रिप्सिन+काइमोट्रिप्सिन 11. इबूप्रोफेन +पैरासिटामोल सिरप 12. पैरासिटामोल ड्रॉप 13. टिकाग्रेलर 90 एमजी 14. टोरसेमाइड 10 एमजी 15. क्लोनाजेपम 0.5 एमजी
16. एमिट्रिप्टीलिन 10 एमजी 17. पर्मेथ्रिन लोशन 18. आयरन + फोलिक एसिड 19. विटामिन-सी 20. कैल्शियम 500 एमजी
21. विटामिन डी3 ड्रॉप 22. एल्बेंडाजोल 400 एमजी। निदेशक ने विभिन्न विभाग के हेड के साथ बैठक कर किया है रिव्यू पहले भी यह समस्या आती रही है। इसे लेकर हाल ही में निदेशक ने विभिन्न विभाग के हेड के साथ बैठक कर इसे रिव्यू किया था। उन्होंने निर्देश दिया है कि विभाग में उपलब्ध दवा में से 10 से 20% ही खत्म होने पर तत्काल इंडेंट कर सेंट्रल स्टोर से दवा मंगाने सुनश्चित करना है, ताकि रोगियों को परेशानी न हो। – डॉ. शिशिर कुमार, पीआरओ रिम्स
