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लखीसराय के सेंटर पर पकड़े गए सॉल्वर गैंग की जांच में ईओयू का खुलासा
री-नीट परीक्षा 2026 में लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय (खगौर) केंद्र पर पकड़े गए सॉल्वर सिंडिकेट की जांच में ईओयू ने बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। किऊल और कवैया थानों में दर्ज केस की पड़ताल में देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों के छात्रों का बाकायदा रेट कार्ड सामने आया है। मास्टरमाइंड डॉ. रविशंकर सम्राट के सिंडिकेट ने सॉल्वर बनने के लिए मेडिकल छात्रों को 3 लाख से 12 लाख तक का ऑफर दिया था। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि पीएमसीएच पटना में एमबीबीएस फाइनल ईयर का छात्र मयंक कश्यप 5 लाख की डील पर खुद परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक ऑपरेटर बनकर बैठ गया था। इसका मकसद अपने ही साथी सॉल्वरों को बिना बायोमेट्रिक मिलान के परीक्षा हॉल में दाखिल कराना था। हाजीपुर निवासी मयंक ने ईओयू को बताया कि पीएमसीएच के सीनियर छात्र सौरभ कुमार ने उसे स्कॉलर के बजाय बायोमेट्रिक ऑपरेटर के तौर पर तैनात करवाया था। इसके लिए उसे 5 लाख रुपए मिलने थे। बायोमेट्रिक टेंडर लेने वाले प्रमोद यादव की मिलीभगत से मयंक गेट पर बैठा। जब उसके साथी मेडिकल छात्र एडिट किए गए पहचान पत्र लेकर पहुंचे, तो फिंगर प्रिंट डेटा मूल अभ्यर्थी से मैच न होने के बावजूद मयंक ने सभी 7 फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा कक्षों में भेज दिया। मास्टरमाइंड की पत्नी की जगह परीक्षा दे रही थी बीएचयू छात्रा
21 जून को लखीसराय के केवी खगौर केंद्र के कमरा नंबर-11 में जब जांच टीम पहुंची, तो सिंडिकेट के सरगना डॉ. रविशंकर सम्राट की पत्नी मधुप्रिया की जगह बीएचयू की छात्रा पूनम कुमारी ओएमआर शीट भरते रंगे हाथ पकड़ी गई। इसके बाद विभिन्न कमरों से 7 मेडिकल छात्र-छात्राएं मूल अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते दबोचे गए। पूरे नेटवर्क को पीएमसीएच के छात्र सौरभ कुमार और पावापुरी मेडिकल कॉलेज के डॉ. रविशंकर सम्राट ने ऑपरेट किया था। छात्रों को एडवांस कैश देकर पटना से कैब और लग्जरी गाड़ियों के जरिए लखीसराय भेजा गया था। एनटीए ने नहीं दिया अभ्यर्थियों का ब्योरा, दिल्ली जाएगी टीम
उधर, जिन अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठे थे, उनका पूरा विवरण 3 बार पत्र लिखने के बाद भी एनटीए ने नहीं दिया है। ईओयू की टीम जल्द दिल्ली जाएगी। एनटीए मुख्यालय जाकर इन अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड को कब्जे में लेगी, ताकि कानूनी तौर पर पुख्ता साक्ष्य जुटाए जा सकें।
री-नीट परीक्षा:12 लाख में बीएचयू, 10 लाख में एम्स और 3 लाख में एनएमसीएच के मेडिकल छात्र बने थे सॉल्वर
