एजुकेशन रिपोर्टर|रांची झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सरकार द्वारा निर्धारित रिस्ट्रक्चरिंग सुर्खियों में है। एक ओर रांची यूनिवर्सिटी के सिर्फ पीजी के 4240 एडमिशन सीटों के लिए 223 शिक्षकों का ढांचा निर्धारित किया गया है। वहीं दूसरी ओर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में यूजी और पीजी की कुल 5181 सीटों के लिए 204 शिक्षकों का प्रावधान किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभाग में औसतन 19 सीटों पर एक शिक्षक उपलब्ध होगा। वहीं डीएसपीएमयू में एक शिक्षक पर 25 सीटों की जिम्मेदारी होगी। यूजी में एक सीटों पर सभी सेमेस्टर को मिलाकर चार स्टूडेंट्स रहते हैं। ऐसी स्थिति में 100 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। इधर सरकार ने कॉलेजों में चल रहे पीजी पाठ्यक्रमों की सीटें निर्धारित नहीं की है। इससे स्पष्ट है कि अगली बार से कॉलेजों में पीजी में एडमिशन नहीं होगा। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के हजारों छात्रों की चिंता बढ़ गई है। नए ढांचे के अनुसार आरयू के पीजी विभागों में कुल 4240 सीटें निर्धारित की गई हैं। इसमें 130 सहायक प्राध्यापक, 59 एसोसिएट प्रोफेसर और 34 प्रोफेसर सहित कुल 223 शिक्षकों के पद शामिल है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक शिक्षक के हिस्से औसतन 19 सीटें आती हैं। सच्चाई यह है कि आधे से अधिक पीजी विभागों में सीटें भरती भी नहीं है। सेशन लेट रहना इसका मुख्य वजह है। डीएसपीएमयू में स्नातक की 3385 और स्नातकोत्तर की 1796 सीटें हैं। कुल मिलाकर प्रवेश क्षमता 5181 सीटों की है। यानि सभी सेमेस्टर मिलाकर छात्रों की संख्या कुल सीटों से लगभग चौगुनी हो जाएगी। इस हिसाब से 126 सहायक प्रोफेसर, 52 एसोसिएट प्रोफेसर और 26 प्रोफेसर, यानी कुल 204 शिक्षक निर्धारित हैं। यहां एक शिक्षक पर औसतन 25 सीट यानी 100 स्टूडेंट्स का भार पड़ता है। यह अनुपात आरयू पीजी की तुलना में काफी अधिक है। रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभागों के लिए सीटें तय हो चुकी हैं, लेकिन कॉलेजों में चल रहे पीजी कोर्सों की सीट क्षमता निर्धारित नहीं हुई है। ऐसे में अगली बार रांची विश्वविद्यालय के कॉलेजों में पीजी सीटों नामांकन बंद हो जाएगा। सिर्फ मोरहाबादी कैंपस स्थित पीजी विभागों में पीजी की पढ़ाई होगी। अभी रांची विश्वविद्यालय के अधीन गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी जिलों में पीजी की पढ़ाई होती है। पीजी की पढ़ाई कॉलेजों से सिमटकर रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभागों तक पहुंच जाने से उच्च शिक्षा का खर्च बढ़ेगा।
री-स्ट्रक्चरिंग… आरयू में सिर्फ पीजी में 223 शिक्षक, जबकि डीएसपीएमयू में यूजी-पीजी के लिए 204 टीचर्स
एजुकेशन रिपोर्टर|रांची झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सरकार द्वारा निर्धारित रिस्ट्रक्चरिंग सुर्खियों में है। एक ओर रांची यूनिवर्सिटी के सिर्फ पीजी के 4240 एडमिशन सीटों के लिए 223 शिक्षकों का ढांचा निर्धारित किया गया है। वहीं दूसरी ओर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में यूजी और पीजी की कुल 5181 सीटों के लिए 204 शिक्षकों का प्रावधान किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभाग में औसतन 19 सीटों पर एक शिक्षक उपलब्ध होगा। वहीं डीएसपीएमयू में एक शिक्षक पर 25 सीटों की जिम्मेदारी होगी। यूजी में एक सीटों पर सभी सेमेस्टर को मिलाकर चार स्टूडेंट्स रहते हैं। ऐसी स्थिति में 100 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। इधर सरकार ने कॉलेजों में चल रहे पीजी पाठ्यक्रमों की सीटें निर्धारित नहीं की है। इससे स्पष्ट है कि अगली बार से कॉलेजों में पीजी में एडमिशन नहीं होगा। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के हजारों छात्रों की चिंता बढ़ गई है। नए ढांचे के अनुसार आरयू के पीजी विभागों में कुल 4240 सीटें निर्धारित की गई हैं। इसमें 130 सहायक प्राध्यापक, 59 एसोसिएट प्रोफेसर और 34 प्रोफेसर सहित कुल 223 शिक्षकों के पद शामिल है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक शिक्षक के हिस्से औसतन 19 सीटें आती हैं। सच्चाई यह है कि आधे से अधिक पीजी विभागों में सीटें भरती भी नहीं है। सेशन लेट रहना इसका मुख्य वजह है। डीएसपीएमयू में स्नातक की 3385 और स्नातकोत्तर की 1796 सीटें हैं। कुल मिलाकर प्रवेश क्षमता 5181 सीटों की है। यानि सभी सेमेस्टर मिलाकर छात्रों की संख्या कुल सीटों से लगभग चौगुनी हो जाएगी। इस हिसाब से 126 सहायक प्रोफेसर, 52 एसोसिएट प्रोफेसर और 26 प्रोफेसर, यानी कुल 204 शिक्षक निर्धारित हैं। यहां एक शिक्षक पर औसतन 25 सीट यानी 100 स्टूडेंट्स का भार पड़ता है। यह अनुपात आरयू पीजी की तुलना में काफी अधिक है। रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभागों के लिए सीटें तय हो चुकी हैं, लेकिन कॉलेजों में चल रहे पीजी कोर्सों की सीट क्षमता निर्धारित नहीं हुई है। ऐसे में अगली बार रांची विश्वविद्यालय के कॉलेजों में पीजी सीटों नामांकन बंद हो जाएगा। सिर्फ मोरहाबादी कैंपस स्थित पीजी विभागों में पीजी की पढ़ाई होगी। अभी रांची विश्वविद्यालय के अधीन गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी जिलों में पीजी की पढ़ाई होती है। पीजी की पढ़ाई कॉलेजों से सिमटकर रांची विश्वविद्यालय के पीजी विभागों तक पहुंच जाने से उच्च शिक्षा का खर्च बढ़ेगा।

