Tuesday, July 14, 2026

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लागत बढ़ने के बाद डिजाइन में किए गए कई बदलाव:सदर अस्पताल… बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट को अब तक नहीं मिली प्रशासनिक मंजूरी


विभाग की मंजूरी के बाद शुरू होगा, लागत 6.45 करोड़ से 10 करोड़ रुपए हुई राज्य के पहले सरकारी बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट के निर्माण का रास्ता अब अंतिम प्रशासनिक मंजूरी पर आकर टिक गया है। रांची के सदर अस्पताल में बनने वाली इस यूनिट की लागत 6.45 करोड़ से बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपए हो गई है। एल-1 हुई कंपनी ने सबसे कम यही रेट यूनिट तैयार करने के लिए दिया है। लागत बढ़ने के साथ यूनिट के प्लान और डिजाइन में भी कई बदलाव हुए हैं। इसी वजह से अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि संशोधित डिजाइन अब पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। मंगलवार को इसे स्वास्थ्य विभाग को भेजा जाएगा। विभाग से डिजाइन और बढ़ी हुई लागत को मंजूरी मिलते ही चयनित एजेंसी को कार्यादेश जारी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। मंजूरी मिलते ही तीन माह में पूरा करना होगा
प्रबंधन के अनुसार, विभाग से संशोधित डीपीआर और बढ़ी हुई लागत को मंजूरी मिलने के बाद चयनित एजेंसी को निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। एजेंसी को कार्य शुरू होने के बाद 3 माह के भीतर यूनिट तैयार कर पूरी तरह संचालित करने योग्य बनाना होगा। झारखंड के मरीजों को लाभ
बीएमटी यूनिट शुरू होने के बाद झारखंड के हजारों मरीजों को दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अन्य महानगर नहीं जाना पड़ेगा। सदर अस्पताल के हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन समेत विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम रांची में ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर सकेगी। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेगा। सातवें तल्ले पर होगा मेडिकल जोन
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के दौरान संक्रमण का खतरा सबसे बड़ी चुनौती होता है। इसी कारण सदर अस्पताल की सातवीं मंजिल पर यूनिट विकसित की जा रही है। यहां नियंत्रित वातावरण, आइसोलेशन जोन, क्लीन रूम, सीमित प्रवेश व्यवस्था और आईसीयू स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम भी लगाया जाएगा। महंगे इलाज का बोझ घटेगा
प्रस्तावित यूनिट में हाई-एफिशिएंसी एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम, संक्रमण नियंत्रण की आधुनिक व्यवस्था, सेंसर आधारित हैंड-फ्री स्टेशन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। वर्तमान में निजी अस्पतालों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट पर 15 से 30 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च आता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह इलाज लगभग असंभव हो जाता है। सदर अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से काफी कम खर्च में ट्रांसप्लांट हो सकेगा।

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