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लोहरदगा शहर के साइडिंग स्थित हिंडाल्को बॉक्साइट कंपनी के गेट पर विस्थापित मजदूरों ने बुधवार को प्रदर्शन कर काम को बंद कराया। इस दौरान नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव ने कहा कि हिंडाल्को कंपनी शुरू से इस क्षेत्र के गरीबों का शोषण करती रही है और इस कार्य में यहां के अधिकांश जनप्रतिनिधियों का उसे भरपूर सहयोग मिलता रहा है। जिस कंपनी कारण मनमानी तरीके से पहाड़ी क्षेत्र से बॉक्साइट निकालकर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी कंपनी कार्य करती है वहां की जनसमस्याओं और जनसुविधाओं का ध्यान रखना उसका पहला काम होता है। कंपनी खोलने से पूर्व इन शर्तों के आधार पर ही उसे खनन कार्य करने की अनुमति सरकार द्वारा दी जाती है। उन्होंने कहा कि कितना दुखद स्थिति है कि लोहरदगा के बॉक्साइट से मुरी और रेनूकोट जैसे शहर 24 घंटा जगमगा रहे हैं और यहां के लोग अंधेरे में रहने को विवश हैं। डीएमएफटी और सीएसआर जैसे फंड जनकल्याण के लिए ही होते हैं। लेकिन कंपनी के द्वारा कागजी खानापूर्ति करते हुए करोड़ों रुपए सीधे गटक लिए जाते हैं और थोड़ा बहुत चढ़ावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी मिल जाता है। जिसके कारण वे भी गूंगा- बहरा बन कर रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी को बॉक्साइट खनन प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के अलावे शहर के बक्शीडीपा से लेकर शंख मोड़ तक लाइट और सीसीटीवी कैमरा लगाना पड़ेगा। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य पेयजल और प्रकृति के संरक्षण में काम करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कंपनी जनहित में ऐसा नहीं करती है तो इसका गंभीर परिणाम कंपनी को भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। वहीं नगर परिषद अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों के द्वारा कंपनी को नौ सूत्री मांग पत्र सौंपी गई। मौके पर जितेंद्र उरांव, सेवक उरांव, लीलामणि उरांव, सुखमणि उरांव, कमला उरांव, फूल कुमारी उरांव, ओपिश्वर उरांव, महेंद्र महली देव, चरण उरांव, बैद्यनाथ महतो, सुनील उरांव, दिनेश उरांव, बृजमोहन उरांव, सुबरा उरांव, राजकुमार उरांव, बलराम उरांव, निर्मल उरांव, छोटे उरांव, प्रदीप टोप्पो, धर्मा उरांव, भोला उरांव, घुड़ा उरांव, बिजाठ उरांव सहित अन्य लोग उपस्थित थे
विस्थापित मजदूरों ने प्रदर्शन कर काम बंद कराया, कंपनी को नौ सूत्री मांग पत्र सौंपा

