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लखीसराय के सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद परिजनों को करीब तीन घंटे तक शव वाहन का इंतजार करना पड़ा, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। आखिरकार मजबूर होकर परिजनों ने निजी वाहन किराये पर लेकर शव को घर पहुंचाया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। इलाज के दौरान बिगड़ी तबीयत, पटना रेफर करने से पहले हुई मौत मृतक की पहचान धंबो बेलदरिया गांव निवासी स्वर्गीय सुखदेव बिन्द के पुत्र राजेंद्र बिन्द के रूप में हुई है। मृतक के पोते ने बताया कि सोमवार देर शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल लाया गया। मंगलवार सुबह करीब नौ बजे तक अस्पताल में उनका इलाज चला। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया, लेकिन पटना ले जाने की तैयारी के दौरान ही उनकी मौत हो गई। शव वाहन के लिए तीन घंटे तक भटकते रहे परिजन परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए उन्होंने अस्पताल में एंबुलेंस और शव वाहन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, लेकिन करीब तीन घंटे तक कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में परिजन शव वाहन की व्यवस्था के लिए भटकते रहे। पैसे मांगने और अभद्र व्यवहार का आरोप परिजनों का आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे की मांग की। वहीं, एक एंबुलेंस चालक ने कथित तौर पर कहा, “अगर तुम्हारा परिजन मर गया तो हम क्या करें, मेरी तबीयत भी खराब है, हम भी मर जाएं क्या?” इस कथित टिप्पणी से परिजन आहत हो गए। अंततः उन्होंने निजी वाहन किराये पर लेकर शव को गांव पहुंचाया। अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और शव वाहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा सदर अस्पताल में शव वाहन और एंबुलेंस की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। अस्पताल प्रशासन का पक्ष नहीं आया सामने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी का बयान सामने नहीं आ सका था। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
