केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा ‘अमृत 2.0’ योजना के तहत धनबाद में संचालित ‘शैलो एक्विफर मैनेजमेंट’ (SAM) और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के वास्तविक जमीनी असर का आकलन शुरू कर दिया गया है। मंत्रालय ने इस वैज्ञानिक अध्ययन का जिम्मा अमृतसर के गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (GNDU) को सौंपा है, जिसकी दो सदस्यीय केंद्रीय टीम सोमवार को धनबाद पहुंची। देश के चुनिंदा शहरों में शामिल धनबाद में इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य पूर्व में विकसित की गई पारंपरिक जल संरचनाओं की उपयोगिता और क्षेत्र के भूजल स्तर में आए सुधारों की पड़ताल करना है। जीवन ज्योति स्कूल के कुएं की उपयोगिता की जांच केंद्रीय टीम के सदस्य रितीश महाजन और गागरी कोले ने नगर निगम के अधिकारियों व कर्मियों के साथ बेकारबांध स्थित जीवन ज्योति स्कूल परिसर का दौरा किया। जमीनी पड़ताल: टीम ने लगभग दो वर्ष पूर्व पुनर्जीवित किए गए स्कूल परिसर के ऐतिहासिक कुएं का मुआयना किया। स्थानीय लोगों से संवाद: टीम ने स्थानीय निवासियों और स्कूल प्रशासन से जानकारी ली कि जीर्णोद्धार के बाद प्रतिदिन कितने लोग इसके पानी का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही कुएं के संरक्षण से आसपास के भूजल स्तर पर पड़े सकारात्मक प्रभाव का डेटा एकत्र किया। गुरूवार को केंद्रीय टीम झरिया स्थित भगतडीह और ऐनाकोठी के पारंपरिक कुओं का भी निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति और जल प्रबंधन का जायजा लेगी। 100 शहरों में धनबाद भी शामिल, अन्य कुओं को जोड़ने की मांग उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पूर्व शुरू हुई ‘शैलो एक्विफर मैनेजमेंट’ (SAM) परियोजना के तहत देश के जिन 100 शहरों का चयन किया गया था, उनमें धनबाद भी शामिल था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इन 5 पारंपरिक कुओं का हुआ था कायाकल्प: जीवन ज्योति स्कूल (बेकारबांध) बेरा कॉलोनी भगतडीह ऐनाकोठी नीचे मुहल्ला (ऐनाकोठी) लक्ष्मी कॉलोनी गंभीर जलसंकट और गिरते भूजल स्तर से जूझ रहे धनबाद शहर में कम लागत से पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने की यह पहल काफी कारगर साबित हुई है। इसी सफलता को देखते हुए धनबाद नगर निगम प्रशासन ने मंत्रालय से सैम (SAM) परियोजना के अगले चरण में शहर के कुछ अन्य उपेक्षित कुओं और बावडियों को शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है।
