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बक्सर में शहीद हवलदार सुनील कुमार सिंह की याद में गेट का शिलान्यास किया गया। इस दौरान उनकी पत्नी सुजाता देवी पति को याद कर भावुक हो गईं और रोते-रोते बेहोश हो गईं। पास बैठी महिलाओं ने उन्हें संभाला। यह कार्यक्रम चौसा नगर पंचायत के नरबतपुर में हुआ। इसमें बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह, एमएलसी सोनू राय, शहीद के पिता जनार्दन सिंह और अन्य परिजन मौजूद थे। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस गेट के निर्माण के लिए 7 लाख 50 हजार 700 रुपए की राशि तय की है। लंबे इंतजार के बाद यह पहल शुरू हुई है, जिससे परिवार को उम्मीद जगी है। हालांकि, सुनील सिंह की यादों ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया। पिता जनार्दन सिंह ने बताया कि वे लगातार बेटे की स्मृति में गेट और स्मारक बनाने की मांग करते रहे हैं। परिवार की मांग है कि शहीद के सम्मान में किए गए वादों को अब जमीन पर उतारा जाए।
सांसद बोले- गेट के बाद बनेगा शहीद स्मारक
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि शहीद गेट का निर्माण शुरू हो रहा है। आगे शहीद स्मारक भी बनाया जाएगा। इससे परिवार और स्थानीय लोगों को उम्मीद मिली है कि सुनील सिंह की स्मृति को स्थायी पहचान देने की दिशा में आगे भी काम होगा। एमएलसी सोनू राय ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
हालांकि परिवार के लिए गेट का निर्माण केवल एक मांग पूरी होने भर की बात नहीं है। उनकी अपेक्षा है कि शहीद की स्मृति में स्मारक बने और परिवार से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों पर भी ठोस पहल हो। मौके से आई तस्वीरें…. ऑपरेशन सिंदूर में दिखाई थी अदम्य वीरता
हवलदार सुनील कुमार सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन के सामने अदम्य साहस का परिचय दिया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 9 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी और ड्रोन हमले के बीच वह अपनी सेंट्री पोस्ट पर तैनात थे। उन्होंने अपनी ओर बढ़ रहे छह पाकिस्तानी ड्रोन को देखकर तत्काल खतरे की सूचना दी और अपनी राइफल से उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की।
इसी दौरान दुश्मन की तोप का गोला उनकी पोस्ट के ऊपर फटा और निकले छर्रों से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल होने के बावजूद वह लगातार ड्रोन की जानकारी देते रहे, जिससे भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई में मदद मिली। साथियों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया। 27 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 6 जून 2025 को उनका निधन हो गया।
बाद में जयपुर में आयोजित सेना दिवस समारोह में उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी सुजाता देवी ने पति का यह सम्मान ग्रहण किया था। उस समय भी पति की वीरता का उल्लेख होते ही उनकी आंखें भर आई थीं।
सम्मान के साथ अधूरे वादों का दर्द
शहीद के पिता और भाई पहले भी स्मारक, बच्चों के भविष्य और परिवार को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़ी मांगें उठा चुके हैं। परिवार का कहना रहा है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कई आश्वासन दिए, लेकिन उन्हें पूरा होने का इंतजार बना हुआ है।
सुनील सिंह के छोटे भाई चंदन कुमार भी सेना में हैं। परिवार को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है, लेकिन अपनों को खोने का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है।
बुधवार को शहीद गेट की नींव रखे जाने से एक अधूरी उम्मीद को आधार मिला है। अब परिवार की निगाहें निर्माण पूरा होने और शहीद स्मारक सहित बाकी मांगों पर कार्रवाई पर टिकी हैं। सुजाता देवी के छलकते आंसुओं ने याद दिलाया कि शहीदों का सम्मान केवल समारोह और घोषणाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके परिवार से किए गए वादे पूरे करना भी उस सम्मान का अहम हिस्सा है।
