
Rupi Soren Life: दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन नहीं रहीं. बुधवार को उन्होंने रांची के हिल व्यू अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह एक बहादुर महिला थीं. जब शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के लिए संघर्ष कर रहे थे, जंगलों और पहाड़ों में छिपकर रहते थे, तब मुश्किल भरे दौर में उन्होंने बहादुरी के साथ जीवन को आगे बढ़ाया. उनके संघर्ष के दिनों में उनकी ननद ने भरपूर साथ दिया था.
प्रभात खबर के पूर्व कार्यकारी संपादक और वर्तमान में झारखंड सूचना आयोग के सदस्य अनुज कुमार सिन्हा बताते हैं कि शिबू सोरेन की अनुपस्थिति में महाजनों और पुलिस दोनों से वह अकेले मुकाबला करतीं थीं. अनुज सिन्हा ने उनके जीवन से जुड़ी कई अहम बातें प्रभात खबर को बतायीं.
जब पूरी तरह अकेली पड़ गयीं रूपी सोरेन
उन्होंने बताया कि शिबू सोरेन से शादी के बाद ही रूपी सोरेन के जीवन में संघर्ष की शुरुआत हो गयी थी. शादी के कुछ ही दिनों बाद शिबू सोरेन को पुलिस ने गिरफ्तार कर हजारीबाग जेल भेज दिया. रूपी परेशान हो उठीं. नयी-नयी शादी हुई थी. इतने पैसे भी नहीं थे कि वह अपने पति को रिहा करवा सकें. पूरी तरह अकेली पड़ गयी थीं.
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पिता से पैसे मांगकर पति को जेल से छुड़ाया
आखिरकार गांव के एक व्यक्ति से उन्होंने मदद मांगी. रूपी ने उससे कहा कि या तो कुछ पैसे उधार दे दीजिए या चांडिल जाने का टिकट कटवा दीजिए. इसके बाद वह अपने मायके चांडिल चली गयीं. वहां अपने पिता से बात की और उनसे आग्रह किया कि वह शिबू सोरेन को जेल से छुड़वाने में मदद करें. पिता से पैसे लेकर आयीं और अपने पति को रिहा करवाया.
पुलिस से कहा- ये शिबू सोरेन का नहीं, रूपी सोरेन का घर है
1970 के आसपास पुलिस अक्सर शिबू सोरेन के घर आती थी. रूपी सोरेन से भी पूछताछ करती थी. शुरू में तो वह कुछ सवालों के जाब दे देती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने पुलिस के किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार करना शुरू कर दिया. एक बार तो उन्होंने पुलिस से साफ-साफ कह दिया कि यह शिबू सोरेन का घर नहीं है. यह रूपी सोरेन का घर है. शिबू सोरेन यहां नहीं आते. शिबू सोरेन जहां हैं, वहां जाकर उनको खोजिए.
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दुर्गा को गोद में लेकर शिबू सोरेन को खोजने जंगल में निकल गयीं रूपी
महाजनों के विरोध और अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन की वजह से शिबू सोरेन को छिप-छिपकर रहना पड़ता था. उन दिनों वह टुंडी के आसपास के जंगल में और पहाड़ों पर रहते थे. इस दौरान रूपी सोरेन को उनकी कोई खोज-खबर नहीं रहती थी. एक बार वह इतनी परेशान हो गयीं कि अपने बेटे दुर्गा को लेकर शिबू सोरेन को खोजने के लिए जंगलों में निकल पड़ीं.
मुश्किल वक्त में भी नहीं हारी हिम्मत
रूपी के साथ उनकी सास और ननद भी चल पड़ीं. एक छोटे बच्चे के साथ तीन महिलाओं को जंगल-पहाड़ों में काफी भटकना पड़ा. यह उनके जीवन का बेहद कठिन दौर था. पति आंदोलन कर रहे थे, पुलिस लगातार उन पर नजर रख रही थी. घर-परिवार की पूरी जिम्मेदारी रूपी के कंधों पर थी. लेकिन मुश्किल वक्त में कभी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.
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