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गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) को उबारने के लिए कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कमेटी तीन दिवसीय दौरे पर 19 अगस्त को रांची आ रही है। कमेटी 20 अगस्त को एचईसी के तीनों प्लांट का स्थलीय निरीक्षण करेगी और उसी दिन झारखंड सरकार के सचिव के साथ अहम बैठक भी करेगी। सांसद तिरुचि शिवा के नेतृत्व वाली इस 6 सदस्यीय टीम में सांसद हंसमुख भाई पटेल समेत अन्य चार सांसद शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान एचईसी के सीएमडी केएस मूर्ति और सभी निदेशक मौजूद रहेंगे। टीम प्लांट की वास्तविक स्थिति, उत्पादन क्षमता, एकाउंट्स, देनदारी और लंबित वर्क ऑर्डर की समीक्षा करेगी। साथ ही अधिकारियों और कामगारों से सीधे संवाद कर कंपनी के पूर्ण पुनरुद्धार (रिवाइवल) का रोडमैप तैयार करेगी। कमेटी एचईसी को भारी-भरकम राहत पैकेज दिलाने के लिए संबंधित मंत्रालय को सिफारिश भी कर सकती है। 500 एकड़ जमीन ट्रांसफर से एचईसी को मिलेंगे ₹5000 करोड़ एचईसी की करीब 500 एकड़ जमीन स्मार्ट सिटी फेज-2 के विस्तार के लिए झारखंड सरकार को ट्रांसफर करने के मामले में राज्य सरकार के सचिव के साथ बातचीत की जाएगी। इसके एवज में एचईसी को करीब 5,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। इस राशि से कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान, देनदारियां निपटाने और प्लांट के आधुनिकीकरण का काम किया जाएगा। एचईसी पर 2200 करोड़ की देनदारी एचईसी पर वर्तमान में 2,200 करोड़ रुपए से अधिक की देनदारी है, जिसमें 300 करोड़ सिर्फ बिजली बिल का बकाया है। लगभग 1,300 कर्मचारियों और अधिकारियों को 30 माह से वेतन नहीं मिला है। हालांकि, कंपनी के पास 450 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर है। तीनों प्लांट्स में काम चल रहा है। प्रबंधन ने प्रति माह 20 करोड़ के प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा है। एचईसी को 500 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी मिले : शनि सिंह एचईसी श्रमिक संघ के अध्यक्ष शनि सिंह ने संसदीय समिति से मांग की है कि एचईसी को तत्काल स्थायी सीएमडी दिया जाए। कहा कि 2017 से बैंक गारंटी नहीं मिलने के कारण एचईसी को हर महीने करीब तीन करोड़ रुपए बैंक लोन चुकाना पड़ता है। उन्होंने 500 करोड़ की बैंक गारंटी और आधुनिकीकरण के लिए विशेष पैकेज देने की मांग की।
