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राजधानी के सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीनों की कमी मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। सदर अस्पताल में रोज लगभग 200 से 250 मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पर्ची कटती है। जिसमें केवल 75 से 80 की ही जांच हो पाती है। बाकी को डेट दे दिया जाता है। जांच के लिए आने वाले मरीजों को 7 दिन से लेकर दो महीने बाद तक की तारीख दी जा रही है। समय पर जांच नहीं होने से इलाज प्रभावित हो रहा है, जबकि कई मरीज मजबूरी में निजी जांच केंद्रों पर अधिक खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराने को विवश हैं। सदर अस्पताल में गायनेकोलॉजी, जनरल सर्जरी, मेडिसिन, यूरोलॉजी, इमरजेंसी और ऑर्थोपेडिक्स विभाग से बड़ी संख्या में मरीज अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहुंचते हैं। लेकिन अस्पताल में केवल दो अल्ट्रासाउंड मशीनें होने के कारण प्रतिदिन सिर्फ 75 से 80 जांच ही हो पा रही हैं। इसके चलते मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को हो रही है। कई मरीजों को 7 दिन, 10 दिन, जबकि कुछ को दो महीने बाद की तारीख दी जा रही है। समय पर जांच नहीं होने से इलाज में भी देरी हो रही है। ऐसे में कई मरीज निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का सहारा लेने को विवश हैं, जहां उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। तीन दिन में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 650 से अधिक मरीज पहुंचे सदर अस्पताल तारीख मरीज कितने कितने
आए जांच लौटे
3 अगस्त 210 78 132
4 अगस्त 220 75 145
5 अगस्त 230 82 148 (नोट : बाहर में अल्ट्रासाउंड की सामान्य जांच के लिए मरीज को 1000 से 1500 रु. तक का करना पड़ता है।)
क्या कहते हैं मरीज अल्ट्रासाउंड मशीनों की संख्या बढ़ाई जाएगी सदर अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। यही कारण है कि दो पाली सुबह 9 बजे से 3 और शाम के 3 से 6 बजे तक जांच होती है। गर्भवती को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए ज्यादा दिनों का नंबर देना मेरी जानकारी में नही हैं, अगर ऐसा है तो उस पर तुरंत संज्ञान लिया जाएगा। बढ़ती हुई मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन मशीनों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। – डॉ. विमलेश कुमार सिंह, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल

