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राज्य सरकार ने झारखंड में लघु खनिजों के अवैध खनन और सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की खरीद को लेकर नियम को सख्त बनाया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने झारखंड लघु खनिज समनुदान (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 अधिसूचित की है। मंगलवार को जारी अधिसूचना में ईंट मिट्टी के अवैध खनन पर राजस्व दर के 10 गुना जुर्माने का प्रावधान किया गया है। विकास कार्यों में खनिज की खरीद के प्रमाण और नियमों की व्याख्या के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं। विकास योजनाओं में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों की खरीद वैध चालान के माध्यम से करने की जिम्मेदारी संबंधित कार्य विभाग, संवेदक, ठेकेदार और आपूर्तिकर्ता पर डाली गई है। नए प्रावधानों के लागू होने से सड़क, भवन और अन्य सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की खरीद और उनके वैध स्रोत की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। संशोधन के तहत नियम-54 को नए सिरे से तय किया गया है। इसके अनुसार, कोई व्यक्ति या उसकी ओर से नियुक्त एजेंट, प्रबंधक, कर्मचारी अथवा ठेकेदार किसी क्षेत्र में बिना वैध अनुमति के ईंट के लिए मिट्टी का उत्खनन, निकासी, परिवहन या भंडारण करता है, तो इस प्रावधान का अनुपालन करना होगा। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है खनिज खरीद का देना होगा हिसाब नए संशोधन में नियम-54 (ए) के बाद नियम-55 जोड़ा गया है। इसके तहत सरकार द्वारा संचालित विकास कार्यों में शामिल कार्य विभाग, संवेदक, ठेकेदार और आपूर्तिकर्ता यह सुनिश्चित करेंगे कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिज वैध चालान के माध्यम से खरीदे गए हों। अधिसूचना में खनन पट्टाधारकों और खनन लाइसेंसधारकों से वैध चालान के जरिए खनिज खरीदने का प्रावधान किया गया है। यदि खनिजों की खरीद वैध चालान के माध्यम से नहीं की गई है, तो प्रावधान के अनुसार दंडात्मक राशि जमा करनी होगी। इसके लिए खनिज के मूल्य, रॉयल्टी और अन्य निर्धारित शुल्कों को आधार बनाया गया है। केंद्र-राज्य के निर्माण कार्य दायरे में नियम में कार्य विभाग की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है। इसके तहत केंद्र या राज्य सरकार के विभाग और उनकी ओर से निर्माण कार्य कराने वाली व्यवस्था शामिल है। कार्य ठेकेदार की परिभाषा में ऐसे व्यक्ति, फर्म, कंपनी या व्यक्तियों के संगठन को शामिल किया गया है, जिनके माध्यम से संबंधित विभाग के साथ अनुबंध के तहत काम कराया जाता है। इससे सरकारी निर्माण कार्यों में ठेकेदारों की भूमिका सीधे महत्वपूर्ण हो जाती है। निर्माण में इस्तेमाल होने वाले खनिजों के स्रोत और खरीद संबंधी दस्तावेजों को लेकर विभागीय निगरानी की जरूरत बढ़ेगी। जुर्माने में डीएमएफटी और पर्यावरणीय सेस भी होंगे शामिल नए नियम में जुर्माने की गणना के लिए अलग-अलग मदों का उल्लेख किया गया है। संशोधन के प्रभावी होने के बाद इस्तेमाल या आपूर्ति किए गए खनिजों के मामले में जुर्माना राशि में खनिज के मूल्य और रॉयल्टी के अलावा जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफटी), आयकर, मैनेजमेंट शुल्क और पर्यावरणीय सेस भी होंगे।
सरकारी निर्माण में वैध चालान अनिवार्य:झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली में दूसरा संशोधन, नियम तोड़ने पर खनिज मूल्य व रॉयल्टी के आधार पर देना होगा दंड
