खास बातें
Kolkata Transport: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उसके आस-पास के जिलों में रोजाना सफर करने वाले आम यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है. राज्य में बसों की किल्लत (Bus Shortage) और यात्रियों को हो रही असुविधा को देखते हुए परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने दुर्गा पूजा से पहले 460 नयी बसें शहर में चलाने का ऐलान किया है.
नयी बसों के लिए जारी हो चुके हैं टेंडर
परिवहन मंत्री ने कहा है कि रोजाना बसों से दफ्तर, स्कूल-कॉलेज जाने वाले लोगों के लिए बस छूटना यानी लेट एंट्री, ऑटो में ठसाठस भीड़ और चौराहों पर लंबा इंतजार आम बात हो गयी है. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए नयी बसों के लिए टेंडर जारी किये जा चुके हैं.
टीएमसी ने सिस्टम को किया तबाह, डिपो में सड़ीं 60 बसें
अर्जुन सिंह ने सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की मौजूदा बदहाली के लिए पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा- राज्य परिवहन के डिपो में अब नाममात्र की ही चालू बसें हैं. टीएमसी सरकार ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को इस कदर नष्ट किया कि उसकी मिसाल नहीं मिलती. शून्य से दोबारा शुरुआत करने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन हम यात्रियों के दर्द को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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बसों को ओवरहॉलिंग के बाद सड़क पर उतारेगी सरकार
अर्जुन सिंह ने कहा कि हमसे पहले की सरकार ने जिन 60 नयी बसों को डिपो में सड़ा दिया, हम उनकी ओवरहॉलिंग (Overhauling) कराकर उन्हें वापस सड़कों पर उतार रहे हैं. इसके साथ ही इंटरसिटी और सिटी बसों के लिए निजी ऑपरेटरों को भी ई-बसें चलाने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है.

Kolkata Transport: क्लीन एनर्जी पर जोर जोर दे रही सरकार
परिवहन मंत्री ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त (Zero-Emission) पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सीमित होने के कारण अभी पूरी तरह इलेक्ट्रिक होना मुमकिन नहीं है. इसलिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण (Mixed-Fuel Approach) अपनाया जा रहा है.
ऐसा होगा बसों का बेड़ा
- नयी 460 बसों में ज्यादा संख्या इलेक्ट्रिक बसों (E-Buses) की होगी.
- कुछ सीएनजी (CNG) बसें भी खरीदी जायेंगी.
- कुछ रूटों की मांग के अनुसार बहुत कम संख्या में डीजल वाहनों को भी बेड़े में शामिल किया जायेगा.
- सरकार को केंद्र सरकार की फेम-2 (FAME-II) योजना के तहत कई इलेक्ट्रिक बसें मिलने की उम्मीद है, जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ कम होगा.
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