Sunday, October 18, 2026
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सर्टिफिकेट के बदले पैसे, कबाड़ में बच्चों की किताबें!:सीवान के सरकारी स्कूल में रुपए मांगते दिखे प्रिंसिपल; बोले-टेबल के नीचे रखो, कोई VIDEO बना लेगा


जिस स्कूल में बच्चों को ईमानदारी और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहीं से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली दो तस्वीरें सामने आई हैं। सीवान के सिसवन प्रखंड के कचनार स्थित उत्क्रमित माध्यमिक उच्च विद्यालय के दो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। एक वीडियो में छात्राओं से मार्कशीट और जरूरी प्रमाणपत्र देने के बदले रुपए मांगने का आरोप है। दूसरे वीडियो में बच्चों के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई किताबों को बोरे में भरकर कबाड़ में ले जाते हुए दिखाया गया है। दोनों वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। मामले में शिक्षा विभाग ने प्रमाणपत्र के बदले पैसे मांगने के आरोप में स्कूल के प्रिंसिपल राजू प्रसाद को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। विभाग की जांच में वीडियो में रुपए लेते दिख रहा व्यक्ति प्रिंसिपल के रूप में चिन्हित किया गया है। वहीं, सरकारी किताबों को कबाड़ में ले जाने के मामले की जांच अभी जारी है। पहले वीडियो में सर्टिफिकेट के बदले रुपए मांगने का आरोप पहले वीडियो में कुछ छात्राएं अपनी मार्कशीट और अन्य जरूरी कागजात लेने के लिए प्रिंसिपल के पास पहुंचती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में प्रिंसिपल दस्तावेज खोजते नजर आते हैं। प्रमाणपत्र मिलने के बाद रुपए दिए जाने को लेकर बातचीत होती है। वीडियो में एक छात्रा प्रिंसिपल को रुपए देती दिखाई देती है। इस दौरान प्रधानाध्यापक छात्रा से रुपए टेबल के नीचे रखने के लिए कहते सुनाई देते हैं। बातचीत में छात्रा पूछती है कि वीडियो कौन बना रहा है। इस पर प्रधानाध्यापक अपने दुश्मनों का जिक्र करते हैं। वीडियो में प्रधानाध्यापक को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि स्कूल में सभी लोग उनके दुश्मन हैं और पढ़ाने को लेकर भी उनसे नाराज रहते हैं। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी विद्यालय में छात्रों को उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र देने के लिए किसी तरह की राशि ली जा सकती है? ‘पैसा टेबल के नीचे रखो, वीडियो बनाता है कोई’ वीडियो में छात्रा और प्रधानाध्यापक के बीच हुई बातचीत ने मामले को और गंभीर बना दिया है। छात्रा रुपए देने के बाद प्रमाणपत्र लेने की बात करती है। प्रधानाध्यापक उसे रुपए टेबल के नीचे रखने के लिए कहते सुनाई देते हैं। वह यह भी कहते हैं कि लोग रुपए का वीडियो बनाते हैं। इसी दौरान छात्रा प्रिंसिपल से पूछती है कि उनका दुश्मन कौन है। प्रधानाध्यापक जवाब देते हैं कि स्कूल में सभी उनके दुश्मन हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो विद्यालय की ही एक छात्रा ने मोबाइल से रिकॉर्ड किया था। बाद में वीडियो सामने आने के बाद मामले की जानकारी शिक्षा विभाग तक पहुंची। दूसरे वीडियो में बोरे भरकर कबाड़ में जाती दिखीं सरकारी किताबें इसी विद्यालय का दूसरा वीडियो शिक्षा व्यवस्था की दूसरी तस्वीर सामने लाता है। वीडियो में एक व्यक्ति विद्यालय परिसर में रखी किताबों से भरे बोरे को अपने ठेले पर लादता दिखाई दे रहा है। दावा है कि ये किताबें बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई थीं। वीडियो में किताबों को विद्यालय परिसर से बाहर ले जाते हुए देखा जा सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूल परिसर से किताबों के बोरे बाहर ले जाए जा रहे थे तो उन्हें रोकने वाला कोई क्यों नहीं था? अगर जांच में सरकारी किताबों को कबाड़ में बेचने की बात सही साबित होती है तो यह सिर्फ सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का मामला नहीं होगा। इसका सीधा असर उन बच्चों पर पड़ेगा, जिनके लिए ये किताबें उपलब्ध कराई गई थीं। खासकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के बच्चों के लिए मुफ्त किताबें उनकी पढ़ाई का महत्वपूर्ण साधन होती हैं। ऐसे में किताबों का कबाड़ में जाना व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को सामने लाता है। एक ही स्कूल से दो वीडियो, दोनों में बच्चों के अधिकारों पर सवाल एक वीडियो में बच्चे अपने जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज लेने के लिए पैसे देते दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में उन्हीं बच्चों के लिए उपलब्ध कराई गई सरकारी किताबें कबाड़ में जाती नजर आ रही हैं। दोनों वीडियो को साथ रखकर देखें तो सवाल सिर्फ प्रधानाध्यापक या किताब ले जाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। सवाल यह भी है कि विद्यालय में निगरानी की व्यवस्था कैसी है? क्या बच्चों से प्रमाणपत्र देने के बदले रुपए लेने की कोई व्यवस्था है? अगर नहीं, तो रुपए किस आधार पर मांगे गए? सरकारी किताबें विद्यालय से बाहर कैसे पहुंचीं? उनका रिकॉर्ड कहां है? और यदि किताबें अनुपयोगी थीं तो उन्हें कबाड़ में बेचने की अनुमति किसने दी? ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार बच्चों की पढ़ाई पर करोड़ों रुपए खर्च करती है। स्कूलों में किताबें, यूनिफॉर्म और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें। ऐसे में अगर इन सुविधाओं का दुरुपयोग होता है तो इसका नुकसान सीधे बच्चों को उठाना पड़ता है। शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापक को जारी किया शो-कॉज मामले में सिसवन के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि प्रमाणपत्र के बदले रुपए मांगने के मामले में विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजू प्रसाद को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से विद्यालय जाकर वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की गई। जांच के दौरान वीडियो में रुपए लेते दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान प्रधानाध्यापक राजू प्रसाद के रूप में हुई है। अब प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग के अनुसार, स्पष्टीकरण और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किताबों के कबाड़ में जाने की भी जांच वहीं, विद्यालय से सरकारी किताबों के बोरे कबाड़ में ले जाने वाले वीडियो को लेकर BEO ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल इस मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि वीडियो में दिखाई दे रही किताबें किस श्रेणी की थीं, उन्हें विद्यालय से बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी और आखिर उन्हें कबाड़ में क्यों भेजा गया। फिलहाल शिक्षा विभाग की जांच का इंतजार है। जांच में अगर वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह तय करना होगा कि स्कूल में बच्चों के अधिकारों के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ करने वालों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

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