सहरसा के बहुचर्चित मिड-डे मील मामले में पटना हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। आगामी 2 जून को पटना हाईकोर्ट में सहरसा पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट पेश की जानी है। इसी क्रम में सोमवार को सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के कार्यालय में सहरसा पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने पीड़ित बच्चों के परिजनों के बयान दर्ज किए। एसडीपीओ कार्यालय में पुलिस अधीक्षक के समक्ष पीड़ित बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अधिकारी ने एक-एक कर परिजनों से घटना के दिन की पूरी जानकारी ली। उनसे भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की तबीयत बिगड़ने के घटनाक्रम और अस्पताल में इलाज की व्यवस्था को लेकर विस्तृत पूछताछ की गई। सैंपलिंग प्रक्रिया में हुई देरी पर कड़ी आपत्ति जताई यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के उस आदेश के तहत की जा रही है, जिसमें अदालत ने जांच के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए थे। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा कूरियर के जरिए दाल-खिचड़ी के सैंपल पटना के अगमकुआं स्थित लैब भेजने और सैंपलिंग प्रक्रिया में हुई देरी पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सहरसा एसपी को स्वयं जांच की निगरानी करने और एसआईटी का नेतृत्व करने का जिम्मा सौंपा था। इस एसआईटी को अपनी रिपोर्ट 2 जून को दाखिल करनी है। लगभग 189 बच्चे बीमार हो गए यह पूरा मामला 7 मई का है, जब सहरसा जिले के बलुआहा और चंद्रयान गांवों के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत परोसा गया मध्याह्न भोजन खाने से लगभग 189 बच्चे बीमार हो गए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में बलुआहा के एक सरकारी मध्य विद्यालय में बच्चों के खाने की थाली से ‘छोटे सांप’ मिलने की बात भी सामने आई थी। इस गंभीर लापरवाही के बाद पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। फिलहाल, 2 जून की महत्वपूर्ण सुनवाई से पहले पुलिस इस मामले में सभी आवश्यक साक्ष्य और बयान जुटाकर अपनी जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में व्यस्त है।
सहरसा मिड-डे मील केस, हाईकोर्ट में SIT रिपोर्ट पेश होगी:पीड़ित बच्चों के परिजनों के बयान दर्ज, पुलिस प्रशासन एक्शन मोड में
सहरसा के बहुचर्चित मिड-डे मील मामले में पटना हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। आगामी 2 जून को पटना हाईकोर्ट में सहरसा पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट पेश की जानी है। इसी क्रम में सोमवार को सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के कार्यालय में सहरसा पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने पीड़ित बच्चों के परिजनों के बयान दर्ज किए। एसडीपीओ कार्यालय में पुलिस अधीक्षक के समक्ष पीड़ित बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अधिकारी ने एक-एक कर परिजनों से घटना के दिन की पूरी जानकारी ली। उनसे भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की तबीयत बिगड़ने के घटनाक्रम और अस्पताल में इलाज की व्यवस्था को लेकर विस्तृत पूछताछ की गई। सैंपलिंग प्रक्रिया में हुई देरी पर कड़ी आपत्ति जताई यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के उस आदेश के तहत की जा रही है, जिसमें अदालत ने जांच के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए थे। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा कूरियर के जरिए दाल-खिचड़ी के सैंपल पटना के अगमकुआं स्थित लैब भेजने और सैंपलिंग प्रक्रिया में हुई देरी पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सहरसा एसपी को स्वयं जांच की निगरानी करने और एसआईटी का नेतृत्व करने का जिम्मा सौंपा था। इस एसआईटी को अपनी रिपोर्ट 2 जून को दाखिल करनी है। लगभग 189 बच्चे बीमार हो गए यह पूरा मामला 7 मई का है, जब सहरसा जिले के बलुआहा और चंद्रयान गांवों के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत परोसा गया मध्याह्न भोजन खाने से लगभग 189 बच्चे बीमार हो गए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में बलुआहा के एक सरकारी मध्य विद्यालय में बच्चों के खाने की थाली से ‘छोटे सांप’ मिलने की बात भी सामने आई थी। इस गंभीर लापरवाही के बाद पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। फिलहाल, 2 जून की महत्वपूर्ण सुनवाई से पहले पुलिस इस मामले में सभी आवश्यक साक्ष्य और बयान जुटाकर अपनी जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में व्यस्त है।

