बिहार राज्य किसान सभा और खेत मजदूर यूनियन के आह्वान पर सोमवार को सहरसा जिला समाहरणालय के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में किसानों और खेत मजदूरों ने केंद्र तथा राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा, जो सरकार को संबोधित था। अंतरिम व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के साथ हुए कथित किसान विरोधी टैरिफ और अंतरिम व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने, किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण बंद करने और सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की भी मांग उठाई। इसके अतिरिक्त, सहरसा में मक्का आधारित उद्योग स्थापित करने, किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी की गई। अवैध वसूली को बंद करने की भी मांग उठाई
प्रदर्शनकारियों ने भागलपुर के पीरपैंती में अडाणी समूह को 1050 एकड़ जमीन दिए जाने के समझौते को रद्द करने की मांग की। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने और दाखिल-खारिज तथा जमीन सर्वे के नाम पर अंचल कार्यालयों में हो रही अवैध वसूली को बंद करने की भी मांग उठाई। धरना सभा को संबोधित करते हुए भाकपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य ओमप्रकाश नारायण ने केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन कम दामों पर कॉरपोरेट कंपनियों को दी जा रही है। नारायण ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को देश और किसानों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर भी सरकार की आलोचना की। इस धरना को किसान सभा के जिला अध्यक्ष खडानंद ठाकुर, परमानंद ठाकुर, उमेश पोद्दार, अमर कुमार पप्पू, राजकुमार चौधरी, प्रभु लाल दास, मोहम्मद जाकिर, मनोहर शाह, चंद्र किशोर भगत, मनोहर शर्मा, ब्रह्मदेव शर्मा, दरोगी शर्मा और श्यामल किशोर झा सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। सभी नेताओं ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।


