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सहरसा नगर निगम के वार्ड संख्या 5 में पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) की एक सड़क को शमशान भूमि बताकर स्थानीय लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस भेजा गया है। इस कार्रवाई से नाराज लोगों ने शुक्रवार को नगर आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और संयुक्त मापी कराने की मांग की है। साथ ही, जांच पूरी होने तक किसी भी कार्रवाई को रोकने की अपील की गई है। स्थानीय निवासी विनय चौधरी और अन्य लोगों ने नगर आयुक्त को बताया कि जिस जमीन को शमशान कहा जा रहा है, वह साल 2006 में ही पथ निर्माण विभाग को दे दी गई थी। अतिक्रमण हटाने का दिया जा रहा नोटिस अभी उस जगह पर पक्की सड़क बनी हुई है। लोग कई सालों से बिना किसी रुकावट के इस सड़क का इस्तेमाल कर रहे हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर पथ निर्माण विभाग की सड़क को ‘शमशान भूमि’ बताकर अधिकारियों को गुमराह किया है। गलत जानकारी के आधार पर सड़क किनारे रहने वाले लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा और डर का माहौल है। मापी और सीमांकन कराने की मांग लोगों ने नगर आयुक्त से कई मांगें की हैं। इनमें साल 2006 के हस्तांतरण दस्तावेज, राजस्व नक्शा, खेसरा-खतियान और पथ निर्माण विभाग के रिकॉर्ड का सत्यापन और मिलान शामिल है। साथ ही, नगर निगम, सत्तरकटैया अंचल और पथ निर्माण विभाग की एक संयुक्त टीम बनाकर मौके पर पारदर्शी तरीके से मापी और सीमांकन कराने की मांग की गई है। मापी के दौरान स्थानीय जमीन मालिकों और निवासियों को मौजूद रहने का मौका दिया जाए। लोगों ने यह भी कहा है कि जब तक कागजी सत्यापन और मापी का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक अतिक्रमण से जुड़ी सभी कार्रवाई तुरंत रोकी जाएं। जिन लोगों ने सड़क की जमीन को शमशान भूमि बताकर प्रशासन को गुमराह किया है, उनके खिलाफ जांच कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सहरसा में सड़क को शमशान बताकर नोटिस, लोग भड़के:नगर आयुक्त को मेमोरैंडम सौंपकर जांच और कार्रवाई रोकने की मांग
