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सहारा समूह में जमा अपनी मेहनत की कमाई वापस कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में निवेशकों ने रविवार को रांची में लोकभवन के समक्ष अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया। विश्व भारती जनसेवा संस्थान के बैनर तले राज्यभर से हजारों सहारा निवेशक रांची पहुंचे हैं। निवेशकों ने सरकार से वर्षों से अटकी राशि जल्द लौटाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, झारखंड में सहारा की विभिन्न योजनाओं में करीब 32,600 करोड़ रुपए निवेशकों के फंसे हैं। उनका कहना था कि कई योजनाएं मैच्योर होने के बावजूद निवेशकों को पूरी राशि नहीं मिली है। निवेशकों ने कहा कि सहारा में जमा राशि जीवनभर की बचत थी। लकड़ी बेच एक लाख रुपए जमा किए थे, अब सब खत्म कांके की राडाहा पंचायत की जासो देवी ने 2003 से लकड़ी बेचकर एक-एक रुपए जोड़े और सहारा में एक लाख रुपए जमा किए। अब रकम फंसने से वह परेशान हैं। उनका कहना है कि सहारा कार्यालय के चक्कर लगाने पर पता चला कि संपत्ति जब्त हो चुकी है। राजेश कुमार के करीब 1.20 करोड़ रुपए फंसे डालटनगंज के मेडिसिन सेक्टर से जुड़े राजेश कुमार ने बताया कि अपने और माता-पिता के नाम पर जमा करीब 1.20 करोड़ रुपए फंसे हैं। वर्ष 2002 में पिता को कैंसर हुआ। पैसे की कमी के कारण 2024 में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। एजेंट बन 2,000 लोगों से जुटाए 13 करोड़ रुपए मधुकम के लालमन साहू सहारा के जमाकर्ता होने के साथ एजेंट भी रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 15-20 वर्षों में करीब 60 लाख रुपये खुद जमा किए। वहीं एजेंट के रूप में करीब 2,000 लोगों से लगभग 13 करोड़ रुपये जमा कराए। अब धरना देने को मजबूर हैं। मुर्गी पाल जोड़े 80 हजार, अब बुढ़ापे की चिंता पिठौरिया के सुतियाम्बे की कौशल्या देवी ने बताया कि उन्होंने 2016 से चार बार 20-20 हजार रुपए सहारा में जमा किए थे। यह रकम मुर्गी व अन्य जानवर पालकर और रेजा-कुली का काम कर जुटाई थी। अब रकम फंसी है, आगे का जीवन कैसे चलेगा, यही चिंता है।

