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विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर बेगूसराय जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से कंकौल स्थित आर्ट गैलरी प्रेक्षा भवन में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 50 थैलेसीमिया मरीज, आमजन, नर्सिंग छात्र-छात्राएं और स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, विधान पार्षद सर्वेश सिंह, डीएम श्रीकांत शास्त्री सहित सभी अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान थैलेसीमिया विषय पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। जिसमें डॉ. प्राची, डॉ. भाव्या, डॉ. निशांत, डॉ. मृत्युंजय, डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. प्रभात और डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने थैलेसीमिया की रोकथाम, पहचान, इलाज व जागरूकता की जानकारी दी। शरीर में एनीमिया की समस्या उत्पन्न हो जाती विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग है, जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला वह प्रोटीन है, जो शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी होने पर शरीर में एनीमिया की समस्या उत्पन्न हो जाती है। माता और पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर हों तो बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने की संभावना बढ़ जाती है। कार्यक्रम में थैलेसीमिया के प्रमुख लक्षण अत्यधिक कमजोरी, बार-बार संक्रमण, त्वचा का पीला पड़ना, बच्चों में शारीरिक वृद्धि का धीमा होना, सांस फूलना और तिल्ली बढ़ने जैसी समस्याओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही CBC, Hb Electrophoresis/HPLC, Serum Ferritin और Prenatal Screening जांच के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने विवाह पूर्व जांच, गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग, जन-जागरूकता और Genetic Counselling को थैलेसीमिया रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय बताया। उपचार के तहत नियमित Blood Transfusion, Iron Chelation Therapy, फोलिक एसिड दवा और कुछ मामलों में Bone Marrow Transplant की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि बेगूसराय से थैलेसीमिया उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। इस दिशा में जो भी सहयोग आवश्यक होगा, उसके लिए सरकार से हरसंभव मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने समाज में एचपीवी वैक्सीन को लेकर फैली भ्रांतियों पर भी चर्चा की। 700 से अधिक बच्चों को बोन मेरो ट्रांसपलांट भारत में 5037 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं। जबकि 700 से अधिक बच्चों को बोन मेरो ट्रांसपलांट किया जा चुका है। जिले के सभी सरकारी अस्पताल खासकर उप स्वास्थ्य केंद्र पर अन्य जांच के साथ थैलेसीमिया की जांच अनिवार्य हो। इससे प्रारंभिक स्तर में ही थैलेसीमिया मरीजों की पहचान हो सकेगी। पहचान के बाद उसका इलाज संभव हो पाएगा। इससे बेगूसराय जिला थैलेसीमिया रोग मुक्त बनेगा। गिरिराज सिंह ने लोगों से अपने आसपास के परिवारों और पड़ोसियों को एचपीवी टीकाकरण के प्रति जागरूक करने की अपील की। जिससे प्रत्येक बच्ची को एचपीवी वैक्सीन का लाभ मिल सके। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एके राय ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का आभार व्यक्त किया।
