Sunday, September 13, 2026

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साहिबगंज में 28.71m पर गंगा का जलस्तर:छत-मचान पर जिंदगी, सड़कों पर रात; 5 दिन में 3 की मौत; गांवों में कमर तक पानी


साहिबंगज झारखंड का एकमात्र जिला है, जहां गंगा बहती है। इन दिनों जिले में गंगा का जलस्तर बढ़ने से दियारा क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। शनिवार को जलस्तर 28.71 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 27.25 मीटर से 1 मीटर 46 सेंटीमीटर ऊपर है। रविवार सुबह 6 बजे यह घटकर करीब 28.65 मीटर हुआ, लेकिन संकट कम नहीं हुआ। किशन प्रसाद, लालबथानी, रामपुर, रामनगर, बलुआ टोली, मखमलपुर दक्षिण और मुसहरी टोला समेत दर्जनों गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। घरों में कमर तक पानी घुस चुका है। कई घर डूब गए, आशियाना उजड़ गया और परिवार सड़क पर आ गए हैं। हाजीपुर दियारा और बाबूपुर में भी पानी बढ़ने से स्थिति बिगड़ रही है। लालबथानी, मखमलपुर, शोभनपुर, हाजीपुर पश्चिम, कोदरजन्ना, चानन, कबूतरखोपी और मदनशाही में बाढ़ का सबसे ज्यादा कहर है। साहिबगंज में बाढ़ से बिगड़े हालात की तस्वीरें… सड़क पर गुजर रही लोगों की रात बाढ़ से घिरे ग्रामीण परिवार और मवेशियों को लेकर ऊंची सड़कों पर शरण लिए हुए हैं। दिन-रात सड़क पर ही गुजर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रातभर जागकर परिवार और मवेशियों की सुरक्षा करनी पड़ रही है। तालझारी अंचल की कल्याणी, मोतीझरना और मसकलैया पंचायत के 1,800 से अधिक प्रभावित परिवारों की सूची अंचल कार्यालय भेजी गई है। इनमें कल्याणी के 1,013, मोतीझरना के 100 और मसकलैया के करीब 700 परिवार हैं। मुखियाओं ने सूखा राशन और राहत सामग्री मांगी है। सीआई सुनील टुडू ने बताया कि सीओ के साथ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया गया है। जिला प्रशासन से राहत की मांग की जा रही है। सड़क पर सालभर जलजमाव, बाढ़ में छात्र भी फंसे उधवा प्रखंड के जोंका गांव में तीनपहाड़-धुलियार-जोंका सड़क पर कार्तिक मंदिर से पंचायत भवन तक करीब 200 मीटर हिस्सा तालाब बना रहता है। नाले गंदगी से भरे हैं और घरों का गंदा पानी सड़क पर जमा होता है। मच्छर-मक्खियों और बीमारी का खतरा बढ़ा है। बारिश में पानी घरों में भी घुसता है। जोंका हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हुआ। इधर साहिबगंज कॉलेज के तीनों छात्रावास बाढ़ में हैं। एसटी, एससी और खरवार छात्रावास के कमरों में पानी घुस गया है। परीक्षा और अन्य कारणों से सैकड़ों छात्र अब भी फंसे हैं। गंदा पानी, बिजली, शौचालयों में जलजमाव और भोजन-पानी की कमी के बीच सांप-बिच्छू का डर भी है। छात्रों ने प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह के माध्यम से डीसी को पत्र भेजकर राहत और वैकल्पिक भोजन की मांग की है। पांच दिन में तीन मौतें, 6 साल की बच्ची का अब तक सुराग नहीं बाढ़ अब जानलेवा साबित हो रही है। सात सितंबर को बड़ी कोदरजन्ना में 56 वर्षीय जीछु राम की डूबने से मौत हुई थी। छह सितंबर को कृष्ण प्रसाद दियारा में नहाने के दौरान छह वर्षीय कंचन कुमारी गहरे पानी में चली गई थी, जिसका अब तक पता नहीं चला है। शुक्रवार रात बड़ी कोदरजन्ना नया टोला में 60 वर्षीय पुष्पा देवी भी बाढ़ के पानी में डूब गईं। उनका घर चारों ओर से पानी से घिरा था। सुबह करीब चार बजे शौच के लिए निकलीं और वापस नहीं लौटीं। तलाश में घर से कुछ दूरी पर शव मिला। पुष्पा, मुरारी मंडल की पत्नी थीं और उनके छह बच्चे हैं। दो बेटियों की शादी हो चुकी है, एक बेटा मजदूरी करता है और दूसरा पढ़ाई। एसआई अखिलेश कुमार सिंह ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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