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रांची पहुंची संसदीय समिति ने एचईसी के तीनों प्लांट देखे आर्थिक संकट से जूझ रहे हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के पुनरुद्धार को लेकर गुरुवार को कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी। उद्योग संबंधी केंद्रीय संसदीय समिति के अध्यक्ष सांसद तिरुचि (त्रिची) शिवा ने दो टूक कहा कि एचईसी कभी बंद नहीं होगी। इसके रिवाइवल के लिए केंद्र सरकार से तत्काल आर्थिक पैकेज दिलाने का ठोस प्रयास किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि पहले चरण में कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान और कंपनी के लिए वर्किंग कैपिटल की व्यवस्था करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके रिवाइवल के लिए झारखंड सरकार से भी बात की जाएगी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि कलाम साहब भी मानते थे कि दूसरा एचईसी नहीं बनाया जा सकता। इसके राष्ट्रीय महत्व और तकनीकी क्षमता को देखते हुए इसे हर हाल में चलाया जाना चाहिए। 2500 करोड़ रुपए के अनुदान की मांग
यूनियन प्रतिनिधियों ने संस्थान को आर्थिक संकट से उबारने के लिए केंद्र से 2500 करोड़ रुपए का अनुदान और 500 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी दिलाने की मांग की। कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान भी प्रमुख मांगों में रहा। यूनियनों ने 30 माह का बकाया वेतन, प्रमोशन और डीए मर्जर का लाभ देने की मांग की। विस्थापित ठेका कर्मियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। राज्यपाल से मिले सांसद तिरुचि शिवा
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से उद्योग संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा, एचईसी के पुनरुद्धार संबंधी उपसमिति की संयोजक एवं लोकसभा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी सहित उपसमिति के सदस्य सांसद सुलता देव, डॉ. मल्लू रवि, हसमुखभाई सोमाभाई पटेल और चंदन चौहान ने शिष्टाचार भेंट की। स्कूल फीस और इलाज की सुविधा का मुद्दा भी उठा
सीएमडी केएस मूर्ति के साथ यूनियनों की बैठक में कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा हुई। 11वीं और 12वीं के बच्चों की स्कूल फीस में रियायत का मामला उठाए जाने पर सीएमडी ने संबंधित स्कूल प्रबंधन से बातचीत कर समाधान कराने का निर्देश दिया। एचईसी अस्पताल को पीपीपी मोड में पारस अस्पताल को दिए जाने के बाद कर्मचारियों के लिए ओपीडी सुविधाओं में आई परेशानी भी सामने रखी गई। सीएमडी ने तत्काल समाधान कराने को कहा। 2200 करोड़ देनदारी, ऑर्डर 450 करोड़
कंपनी पर वर्तमान में 2,200 करोड़ रुपए से अधिक की देनदारी है, जिसमें बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाये शामिल हैं। करीब 1,300 कर्मचारियों और अधिकारियों को लगभग 30 महीने से वेतन नहीं मिला है। एचईसी के पास करीब 450 करोड़ रुपए के वर्कऑर्डर हैं और तीनों प्लांटों में उत्पादन जारी है।
