
Sawan Mela: कंधे पर विशाल मोर की आकृति, चारों तरफ रंग-बिरंगी सजावट और जुबां पर ‘बोल बम’ का जयघोष. शुक्रवार को सुलतानगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर बंगाल से पहुंचे कांवरियों का एक जत्था कुछ इसी अंदाज में बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर रवाना हुआ. विशाल और आकर्षक मोर वाली कांवर को देखकर रास्ते से गुजर रहे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजरें कुछ देर के लिए ठहर गयीं.
श्रावणी मेला में हर दिन हजारों कांवरिये सुलतानगंज पहुंचते हैं. उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करने के बाद गंगाजल भरकर वे करीब 98 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए निकलते हैं. इस लंबी धार्मिक यात्रा में कांवरियों की भक्ति तो दिखाई देती ही है, लेकिन बंगाल से आने वाले कई जत्थे अपनी अनोखी कांवरों के जरिये कला और रचनात्मकता की भी झलक दिखाते हैं.
जब कांवरिया पथ पर दिखा विशाल मोर
शुक्रवार को बंगाल के युवा कांवरियों का जत्था जब कच्ची कांवरिया पथ से गुजरा तो उनकी कांवर ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. कांवर को विशाल मोर की आकृति दी गयी थी. सफेद रंग के मोर को रंग-बिरंगे सजावटी सामान से सजाया गया था.
कांवर का आकार और उसकी सजावट इतनी आकर्षक थी कि रास्ते से गुजरने वाले कई लोगों की निगाहें उस पर टिक गयीं. कांवरियों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी इसे कौतूहल से देखते रहे.
यह सिर्फ एक सजावटी कांवर नहीं थी. इसके पीछे कांवरियों की कई दिनों की तैयारी और बाबा बैद्यनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा जुड़ी थी.
आस्था के साथ कला का संगम
बंगाल से आये कांवरियों ने बताया कि कांवर यात्रा उनके लिए सिर्फ गंगाजल लेकर बाबा धाम तक पहुंचने की धार्मिक यात्रा नहीं है. वे अपनी श्रद्धा को अलग-अलग कलात्मक रूपों के माध्यम से भी व्यक्त करना चाहते हैं.
इसी सोच के तहत कांवर को मोर की आकृति दी गयी. रंग-बिरंगी सजावट के साथ विशाल मोर को तैयार किया गया, ताकि यात्रा यादगार बन सके और बाबा के प्रति उनकी भक्ति भी अलग अंदाज में सामने आये.
कांवरियों के मुताबिक, ऐसी कलात्मक कांवर तैयार करने में मेहनत जरूर लगती है, लेकिन यात्रा के दौरान जब लोग इसे देखकर उत्साहित होते हैं तो उनकी मेहनत सफल महसूस होती है.
98 किलोमीटर की पैदल यात्रा में बढ़ता उत्साह
सुलतानगंज से देवघर तक करीब 98 किलोमीटर की कांवर यात्रा आसान नहीं होती. श्रद्धालु गंगाजल लेकर पैदल चलते हैं और रास्ते में अलग-अलग पड़ावों पर विश्राम करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ते हैं.
इस यात्रा के दौरान कांवरिये एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हैं. ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से कांवरिया पथ लगातार गूंजता रहता है. ऐसे माहौल में विशाल मोर वाली कांवर श्रद्धालुओं के बीच अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र बनी रही.
स्थानीय लोगों के लिए भी खास नजारा
श्रावणी मेला के दौरान सुलतानगंज और कांवरिया पथ पर स्थानीय लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं की विविधता देखने को मिलती है. अलग-अलग राज्यों के कांवरिये अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, पहनावे और कांवर की सजावट के साथ यात्रा करते हैं.
बंगाल के इस जत्थे की मोर वाली कांवर भी इसी सांस्कृतिक विविधता का हिस्सा बनी. स्थानीय लोगों के लिए यह धार्मिक यात्रा के साथ कला और रचनात्मकता का भी आकर्षक उदाहरण रही.
कांवरियों के उत्साह ने बढ़ायी मेले की रौनक
श्रावणी मेला सिर्फ पूजा और कांवर यात्रा तक सीमित नहीं रहता. पूरे रास्ते श्रद्धालुओं की गतिविधियों, सेवा शिविरों और अलग-अलग तरह की कांवरों से मेले का माहौल जीवंत बना रहता है.
बंगाल के कांवरियों की विशाल मोर वाली कांवर ने भी इसी माहौल में एक अलग रंग जोड़ दिया. कंधे पर कांवर संभालते हुए युवा कांवरिये लगातार बाबा बैद्यनाथ के जयकारे लगाते हुए देवघर की ओर बढ़ते रहे.
Sawan Mela: बाबा धाम की ओर बढ़ा बंगाल का जत्था
गंगा स्नान और जल भरने के बाद बंगाल के कांवरियों का यह जत्था अपनी कलात्मक कांवर के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर रवाना हो गया. उनके लिए विशाल मोर श्रद्धा और रचनात्मकता का प्रतीक था.
कांवरियों के कंधे पर विशाल मोर था, जुबां पर ‘बोल बम’ का जयघोष और मन में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की उम्मीद. इसी उत्साह के साथ वे करीब 98 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर आगे बढ़ गये.
The post सुलतानगंज में दिखी अनोखी कांवर, विशाल मोर लेकर बाबा धाम निकले बंगाल के कांवरिये appeared first on Prabhat Khabar.
