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पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल के डकार में फंसे कुढ़नी के उमाशंकर कुमार की अब वतन वापसी की उम्मीद जगी है। भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद कंपनी मालिक ने बुधवार को उनका पासपोर्ट वापस कर दिया। दूतावास ने उमाशंकर को तीन दिनों के अंदर भारत भेजने की बात कही है। उनके हवाई टिकट की व्यवस्था भी दूतावास की ओर से किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे पहले उमाशंकर के पासपोर्ट और वीजा कंपनी के पास होने, वेतन नहीं मिलने और लंबे समय तक काम कराने की बात सामने आई थी। दैनिक भास्कर ने मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद स्थानीय सांसद सह केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके बाद भारतीय दूतावास की ओर से मामले में कार्रवाई शुरू हुई। कंपनी मालिक को दूतावास ने किया तलब बुधवार को उमाशंकर और कंपनी मालिक को भारतीय दूतावास बुलाया गया। दोनों से करीब चार घंटे तक पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई। बातचीत के बाद दूतावास के निर्देश पर कंपनी मालिक ने उमाशंकर का पासपोर्ट वापस कर दिया। दूतावास के अधिकारियों ने कंपनी मालिक को एग्रीमेंट के अनुसार उमाशंकर को 30 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान करने का निर्देश दिया। उमाशंकर ने अब तक किए गए भुगतान का पूरा हिसाब स्पष्ट कराने का अनुरोध किया। इस पर अधिकारियों ने कंपनी मालिक को बकाया राशि का हिसाब कर भुगतान करने को कहा। इस दौरान कंपनी मालिक को अधिकारियों की फटकार भी सुननी पड़ी। भारत भेजे जाने तक कंपनी में सुरक्षित रखने का निर्देश दूतावास ने कंपनी मालिक को निर्देश दिया कि भारत भेजे जाने तक उमाशंकर को सुरक्षित रखा जाए। उन्हें गुणवत्तापूर्ण खाना उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उमाशंकर से किसी तरह के दुर्व्यवहार की शिकायत मिलने पर कंपनी मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उमाशंकर ने बताया कि वह फिलहाल कंपनी में पहुंच गए हैं और उन्हें खाना भी दिया गया है। दूतावास की ओर से तीन दिनों के अंदर भारत भेजे जाने की बात कही गई है। 60 हजार वेतन का भरोसा, पहुंचने पर 30 हजार का एग्रीमेंट कुढ़नी के कोठिया निवासी उमाशंकर 17 मई को रोजगार के लिए डकार पहुंचे थे। परिवार के अनुसार, भारत में उन्हें 60 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन देने की बात कही गई थी। हालांकि, डकार पहुंचने के बाद कंपनी की ओर से 30 हजार रुपए प्रतिमाह का एग्रीमेंट कराया गया। उमाशंकर के मुताबिक, 19 मई से वह कंपनी की हैचरी में काम कर रहे हैं। उनका आरोप था कि कंपनी ने पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया था और उन्हें रोज करीब 12 घंटे काम करना पड़ता था। पहले की रिपोर्टिंग में उमाशंकर ने वेतन भुगतान में भी परेशानी की बात कही थी। परिवार ने लगाई थी सुरक्षित वापसी की गुहार उमाशंकर के सेनेगल में फंसने की खबर सामने आने के बाद उनका परिवार लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहा था। पत्नी चांदनी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों ने सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। परिवार के मुताबिक, उमाशंकर के विदेश में फंसे रहने से घर की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा। मामला सामने आने के बाद सांसद राजभूषण चौधरी निषाद ने विदेश मंत्रालय से संपर्क कर उमाशंकर की सुरक्षा और जल्द वतन वापसी के लिए हस्तक्षेप की मांग की थी। अब दूतावास की कार्रवाई के बाद परिवार को उमाशंकर के जल्द घर लौटने की उम्मीद जगी है। अब टिकट और वापसी का इंतजार पासपोर्ट वापस मिलने के बाद उमाशंकर के भारत लौटने की सबसे बड़ी अड़चन दूर हो गई है। दूतावास की ओर से हवाई टिकट की व्यवस्था किए जाने और तीन दिनों में भारत भेजने की बात कही गई है। फिलहाल उमाशंकर कंपनी में हैं और दूतावास के निर्देश पर उन्हें सुरक्षित रखने को कहा गया है। अब परिवार को इंतजार है कि दूतावास के आश्वासन के अनुसार अगले तीन दिनों में उमाशंकर सुरक्षित भारत लौटें और लंबे समय से चल रही परेशानी खत्म हो।
सेनेगल में फंसे उमाशंकर की वतन वापसी का रास्ता साफ:दूतावास ने कंपनी मालिक को तलब कर पासपोर्ट लौटवाया, 3 दिन में भारत भेजने की तैयारी
