
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरभ गांगुली के पक्ष में दिये गये 14.49 करोड़ रुपए के आर्बिट्रल अवॉर्ड को चुनौती देने वाली पर्सेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट की अपील पर हस्तक्षेप से मना कर दिया. शीर्ष अदालत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की खंडपीठ ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल और कलकत्ता हाईकोर्ट के समवर्ती निष्कर्षों में दखल देने से इनकार किया.
प्लेयर रिप्रेजेंटेशन एग्रीमेंट से जुड़ा है विवाद
विवाद वर्ष 2003 में सौरभ गांगुली और पर्सेप्ट के बीच हुए प्लेयर रिप्रेजेंटेशन एग्रीमेंट से जुड़ा था. समझौते में प्रावधान था कि यदि गांगुली लगातार 6 महीने भारतीय टीम से बाहर रहते हैं, तो कंपनी समझौता समाप्त कर सकती है.
सौरभ के टीम से बाहर होने के बाद रद्द नहीं किया एग्रीमेंट
सौरभ गांगुली फरवरी 2006 में टीम से बाहर हुए और एक अगस्त 2006 को 6 महीने पूरे हो गये. हालांकि, पर्सेप्ट ने उस समय एग्रीमेंट रद्द नहीं किया और सौरभ के दोबारा टीम में लौटने के बाद भी करीब एक साल तक उनका प्रतिनिधित्व जारी रखा.
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2007 में सौरभ गांगुली को भेजा टर्मिनेशन नोटिस
कंपनी ने नवंबर 2007 में टर्मिनेशन नोटिस दिया. आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने गांगुली के पक्ष में 14,49,91,000 रुपए का अवॉर्ड, 12 प्रतिशत ब्याज और 50 लाख रुपए लागत खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया था.
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हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा अवॉर्ड
आगे चल कर मामला सामने आने पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी अवॉर्ड को बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट में पर्सेप्ट की ओर से सीनियर एडवोकेट नकुल दीवान और सौरभ गांगुली की ओर से सीनियर एडवोकेट गौरव बनर्जी पेश हुए. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों और आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अपील को आगे सुनने से मना कर दिया.
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