Monday, June 1, 2026

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स्कूटी सीखने निकले दो नाबालिगों की मौत:पश्चिमी सिंहभूम में कल्वर्ट से टकराकर गिरे, सिर में लगी चोट, मौके पर ही हुई मौत


पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर थाना क्षेत्र के पुराना मनोहरपुर गांव में स्कूटी चलाने निकले दो नाबालिग दोस्तों की जान चली गई। मृतकों की पहचान वतन लोहार (14) और ओम सांडिल (17) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने किसी परिचित से स्कूटी लेकर पास के मैदान में अभ्यास करने की योजना बनाई थी। मैदान पहुंचने से पहले तेज रफ्तार स्कूटी कल्वर्ट से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों किशोर स्कूटी से उछलकर कल्वर्ट के नीचे जा गिरे। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिससे दोनों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। दुर्घटना की खबर मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और तत्काल दोनों को मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। 15 अगस्त को हुआ था जन्म, इसलिए रखा था नाम ‘वतन’ मृतक वतन के पिता संजय लोहार ने रुंधे गले से बताया कि उनके बेटे का जन्म देश के स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को होने के कारण उन्होंने उसका नाम ‘वतन’ रखा था। वतन संत अगस्तीन उच्च विद्यालय में आठवीं कक्षा का छात्र था। वहीं ओम सांडिल ने इसी वर्ष मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी और संत अगस्तीन कॉलेज में इंटर कला संकाय में दाखिला लिया था। दोनों परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। इनके पिता मजदूरी कर घर चलाते हैं। परिवार की उम्मीद थी कि पढ़-लिखकर उनके बच्चे भविष्य में सहारा बनेंगे, लेकिन एक पल की चूक ने दोनों घरों की खुशियां छीन लीं। घटनास्थल पर बिखरे स्कूटी के टूटे हुए हिस्से और खून के निशान हादसे की भयावहता की कहानी बयां कर रहे थे। नाबालिग बच्चों के वाहन चलाने को लेकर क्या कहता है कानून भारत में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के मोटर वाहन चलाने की अनुमति नहीं है। हालांकि 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों को केवल 50 सीसी तक की कुछ श्रेणी की गाड़ियों के लिए विशेष लाइसेंस मिल सकता है। लेकिन सामान्य स्कूटी और मोटरसाइकिल चलाने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। वहीं मोटर वाहन अधिनियम, 2019 के तहत यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा जाता है, तो वाहन मालिक या अभिभावक को जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे मामलों में वाहन मालिक या अभिभावक पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही 3 साल तक की सजा का भी प्रावधान है। इसके अलावा संबंधित वाहन का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष तक निलंबित किया जा सकता है।

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