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स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर बिहार के प्रमुख स्टील कारोबारी कृष्ण कुमार राय को राज्य सरकार की ओर से सम्मानित किया गया है। उन्हें ईमानदारी से टैक्स जमा करने और व्यापार में उत्कृष्ट योगदान के लिए ये सम्मान मिला है। ये सम्मान कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने उन्हें दिया। साथ में उन्हें 21 हजार रुपए का चेक भी भेंट किया गया। इस मौके पर कृषि मंत्री ने न केवल बधाई दी बल्कि कारोबार को और ऊंचाई पर ले जाने की शुभकामनाए भी दी। सम्मान प्राप्त करने के बाद कृष्ण कुमार राय ने खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यापार में ईमानदारी ही सफलता की असली कुंजी है। पहला स्थान एक महिला व्यवसायी को मिलने पर उन्होंने बेहद प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं का व्यापार में आगे आना बेहद सकारात्मक संदेश देता है। भामाशाह अवार्ड की 3 तस्वीरें देखिए कृष्ण कुमार राय बोले- सभी को ईमानदारी से टैक्स भुगतान करना चाहिए आम जनता और अन्य कारोबारियों को संदेश देते हुए राय ने कहा कि सभी को ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करना चाहिए। टैक्स की चोरी करने से देश और राज्य का विकास रुकता है। जब सरकार मजबूत होगी और राजस्व बढ़ेगा। तभी राज्य का चहुमुखी विकास संभव है। थोड़े से फायदे के लिए टैक्स बचाना गलत सोच है। यदि हम सब मिलकर थोड़ा-थोड़ा योगदान देंगे, तो बिहार प्रगति के नए पथ पर अग्रसर होगा। कृष्ण कुमार राय पिछले 10 साल से स्टील कारोबार में एक्टिव कृष्ण कुमार राय पिछले 10 वर्षों से स्टील के व्यवसाय में सक्रिय हैं। वे ‘समृद्धि स्टील’ फर्म के मालिक हैं। इसके साथ ही वे जिंदल पैंथर के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर भी हैं। उनका व्यापार बिहार के 10 जिलों में फैला हुआ है। कृष्ण कुमार राय बिना किसी टैक्स चोरी के, पूरी पारदर्शिता के साथ सरकार को समय पर टैक्स का भुगतान करते आ रहे हैं। इसी ईमानदारी का परिणाम है कि उन्हें लगातार दूसरी बार ‘भामाशाह अवॉर्ड’ से नवाजा गया है। बिहार में भामाशाह सम्मान मुख्य रूप से दो अलग-अलग संदर्भों में दिया जाता है—पहला, वाणिज्य कर (Tax) विभाग द्वारा सबसे ज्यादा जीएसटी या टैक्स योगदान देने वाले उद्योगपतियों/संस्थानों को, और दूसरा, समाज या विभिन्न संगठनों (जैसे साहू/वैश्य समाज) द्वारा सामाजिक, शैक्षणिक या व्यावसायिक क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करने वाले लोगों को। बिहार सरकार ने साल 2025 से भामाशाह अवॉर्ड की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक, राय हर साल अपनी उत्कृष्ट करदाता श्रेणी में ये मुकाम हासिल कर रहे हैं। इस वर्ष उन्हें टैक्स भुगतान की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। 50 हजार की पूंजी और संघर्ष से खड़ी की 150 करोड़ की कारोबारी इमारत कृष्ण कुमार राय के मुताबिक, ग्रेजुएशन पार्ट-2 की पढ़ाई के बाद उन्होंने 2006 में अपने पिता का ट्रक बेचकर मिले 6 लाख की लागत से छड़-सीमेंट की ‘मगध आयरन’ नाम से पहली दुकान खोली। शुरुआती वर्षों में कारोबार ठीक चला। लेकिन 2014 तक ठेकेदारों के पास पैसा फंसने और डूब जाने के कारण वे गंभीर आर्थिक तंगी में आ गए। तमाम संकट आए पर हिम्मत नहीं हारी। मात्र 50,000 से कृष्ण कुमार राय ने की नई शुरुआत सब कुछ डूब जाने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2014 में दुखहरणी मन्दिर स्थित पैतृक घर के नीचे बची हुई थोड़ी सी जगह में किसी तरह से बहुत थोड़े से माल से काम शुरू किया और ‘समृद्धि सीमेंट स्टोर’ नाम से नए प्रतिष्ठान की नींव रखी। उस समय उनके पास मात्र 50,000 की पूंजी थी। कई लोगों ने उन्हें छड़-सीमेंट का काम छोड़ कर दूसरा व्यापार करने की सलाह दी। कई लोगों ने तंज भी कसे। लेकिन वे अपने फैसले पर टिके रहे और लोहे के कारोबार में ही डटे रहे। चचेरे भाई से माल लेकर शुरू किया सफर शुरुआती दिनों में वे अपने चचेरे भाई की दुकान से माल लाकर बेचते थे। धीरे-धीरे मेहनत और निरंतरता के बल पर पूंजी बढ़ती गई। खुद को एक छोटे दुकानदार से डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में स्थापित किया। उन्होंने बताया कि एक दौर वह था जब मैं भाई से माल लेकर बेचता था, और आज स्थिति यह है कि मैं उन्हें माल आपूर्ति करता हूँ। 10 जिलों में नेटवर्क और 150 करोड़ का टर्नओवर आज यह प्रतिष्ठान ‘जिंदल पैंथर’ का डिस्ट्रीब्यूटर है और 10 जिलों में अपना कारोबार संभाल रहा है। कंपनी का वार्षिक टर्नओवर लगभग 150 करोड़ तक पहुंच चुका है। इस 10 से 14 वर्षों के लंबे संघर्ष और सफलता के सफर में उनके बेटे अभिषेक कुमार का अहम योगदान रहा। पिछले 10 वर्षों से बेटा कदम से कदम मिलाकर कारोबार में साथ दे रहा है और अब मुख्य रूप से वही पूरे व्यापार की देखरेख कर रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत के दिनों में जो पैसा डूबा वह आज तक वापस नहीं हुआ। इस बात का दुख आज भी है। यदि ऐसा नहीं होता तो आज और बड़ा मुकाम मेरे हिस्से होता।


