Friday, October 16, 2026
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हजारीबाग में फुटबॉल ने रोके बाल विवाह:जिस गेंद को छूने पर बेटियों को मार पड़ती थी, अब ग्रेजुएशन से पहले शादी नहीं करने की ली शपथ


अब गोल दाग रहीं बेटियां, मां कात्यायनी सा अचूक लक्ष्य, अचूक निशाना और शौर्य का संगम… हॉकी के बाद अब फुटबॉल के मैदान में रच रहीं इतिहास
हजारीबाग के गुरहेट गांव के मजदूर कोलेश्वर राम जब अपनी 20 वर्षीया बेटी लीसा के ब्याह की तैयारी कर रहे थे, तब लीसा ने चुपचाप समझौता करने के बजाय फुटबॉल थाम ली। ‘नया सवेरा विकास केंद्र’ के सहयोग से आज लीसा संत कोलंबस कॉलेज में उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं। संस्था के बीरेंद्र कुमार बताते हैं कि कभी यहां मैदान में उतरने पर लड़कियों की पिटाई होती थी। फुटबॉल छीन ली जाती थी। संस्था ने सुरक्षा देकर मैच कराए और 7-8 शादियां रुकवाईं। आज गुरहेट, बोहरनपुर, बोसा और धवैया सहित 11 गांवों में बेटियों की 11 फुटबॉल टीमें मैदान में पसीना बहा रही हैं। इनमें मुस्लिम बेटियां भी बराबरी से कदमताल कर रही हैं। कमाल यह कि जिन गांवों में लड़कियां खेल रही हैं, वहां बाल विवाह पूरी तरह थम चुका है। बेटियों ने सामूहिक संकल्प लिया है- विवाह अब ग्रेजुएशन की डिग्री के बाद ही होगा। 18 गोल और एक भी हार नहीं
2025-26 सब-जूनियर गर्ल्स राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप के ग्रुप स्टेज में झारखंड की बेटियों ने कुल 18 गोल दागे। फुटबॉल का पावरहाउस कहे जाने वाले मणिपुर को 3-2 से हराकर राष्ट्रीय चैंपियन बनीं। 02 कांस्य पदक हॉकी में जीते
राष्ट्रीय खेलों के लगातार दो संस्करणों में झारखंड की महिला हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीता। 2026 एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम में सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग शामिल रहीं। 6वां स्थान रिले में ​हासिल
महिला 4×100 मीटर रिले स्पर्धा में राज्य की टीम फाइनल में छठे स्थान पर रही। साफ है कि प्रतिभाएं राष्ट्रीय मंच के फाइनल तक पहुंच रही हैं, बस इसे पदक में तब्दील करने के लिए अंतिम फिनिशिंग टच की दरकार है। तीरंदाजी कोच पद्मश्री पूर्णिमा महतो ने कहा
स्कूल स्तर से सही सुविधा मिले तो बेहतर परिणाम मिल सकता है
झारखंड की बेटियों में प्रतिभा और मेहनत दोनों हैं। जरूरत है कि उन्हें छोटी उम्र से ही अच्छी डाइट, आधुनिक उपकरण, बेहतर प्रशिक्षण और खेल विज्ञान की सुविधाएं मिलें। यदि स्कूल स्तर से प्रतिभाओं को सही सुविधा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिले, तो झारखंड की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर परिणाम दे सकती हैं।

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